28 सितंबर को 'ब्रेकिंग रेबीज बाउंड्रीज' (रेबीज की सीमाओं को तोड़ना) थीम के तहत विश्व रेबीज दिवस मनाते हुए, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), खाद्य और कृषि संगठन (FAO), विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) और ग्लोबल अलायंस फॉर रेबीज कंट्रोल (GARC) ने कुत्तों के टीकाकरण और मानव पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलेक्सिस में निवेश तेज करने का संयुक्त आह्वान किया। फ्रांसीसी सूक्ष्मजीव विज्ञानी लुई पाश्चर की पुण्यतिथि पर प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला यह अभियान 'ज़ीरो बाय 30'—वर्ष 2030 तक कुत्तों से होने वाली मानव रेबीज मौतों को समाप्त करने के अंतर्राष्ट्रीय लक्ष्य—को प्राप्त करने के लिए आवश्यक कदमों को रेखांकित करता है।
समय पर टीकाकरण के माध्यम से 100 प्रतिशत रोकथाम योग्य होने के बावजूद, रेबीज हर साल 150 से अधिक देशों और क्षेत्रों में अनुमानित 59,000 मानव जीवन लेता है, जो हर नौ मिनट में एक मृत्यु के बराबर है। मानव मामलों में से लगभग 95 प्रतिशत अफ्रीका और एशिया में होते हैं, जहां ग्रामीण और वंचित समुदायों पर सबसे भारी बोझ पड़ता है, और सभी काटने के शिकार लोगों में 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत है।
वन हेल्थ समन्वय और सामूहिक श्वान टीकाकरण
चूंकि मनुष्यों में रेबीज के 99 प्रतिशत तक संचरण के लिए घरेलू और आवारा कुत्ते जिम्मेदार हैं, इसलिए महामारी विज्ञानियों का जोर है कि प्रभावित क्षेत्रों में कम से कम 70 प्रतिशत कुत्तों की आबादी का टीकाकरण करना स्रोत पर ही संचरण चक्र को तोड़ने का सबसे प्रभावी तरीका है। यूनाइटेड अगेंस्ट रेबीज फोरम के माध्यम से पशु चिकित्सा और सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय सीमा-पार निगरानी, आवारा कुत्तों के लिए ओरल रेबीज टीकाकरण परीक्षण और सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम चला रहे हैं।
कई देशों ने पिछले एक वर्ष में उल्लेखनीय प्रगति दिखाई है। मैक्सिको कुत्तों से फैलने वाले मानव रेबीज के उन्मूलन को प्रमाणित करने वाला पहला देश बना हुआ है, जबकि भारत (राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के तहत), फिलीपींस, कंबोडिया, तंजानिया और केन्या में राष्ट्रीय अभियानों ने नगरपालिका स्तर पर श्वान टीकाकरण और डिजिटल बाइट-रिपोर्टिंग प्रणाली का विस्तार किया है।
“रेबीज टीके से 100 प्रतिशत रोकथाम योग्य है, फिर भी यह हर नौ मिनट में एक इंसान की जान ले लेता है—जिनमें अधिकतर ग्रामीण समुदायों के बच्चे होते हैं। वन हेल्थ सहयोग के माध्यम से सीमाओं को तोड़कर इस त्रासदी को समाप्त किया जा सकता है।”
गावी (Gavi) वैक्सीन रोलआउट से उपचार की पहुंच में विस्तार
2024 के आयोजन के दौरान रेखांकित की गई एक महत्वपूर्ण उपलब्धि पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलेक्सिस (PEP) के लिए मानव रेबीज टीकों में गावी (वैक्सीन अलायंस) के निवेश का जमीनी क्रियान्वयन है। महामारी से जुड़ी देरी के बाद, अब 50 से अधिक गावी-पात्र देश सब्सिडी वाले इंट्राडर्मल रेबीज टीकों और कोल्ड-चेन सहायता के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिससे इलाज का खर्च काफी कम हो जाएगा।
WHO के नैदानिक दिशानिर्देश इंट्रामस्क्युलर के बजाय खुराक-बचत वाले इंट्राडर्मल (त्वचा के भीतर) टीकाकरण प्रोटोकॉल को अपनाने की पुरजोर सिफारिश करते हैं, जो टीके की मात्रा और लागत को 60 प्रतिशत तक कम करता है और घाव को तुरंत धोने व गंभीर मामलों में रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन के साथ दिए जाने पर त्वरित सुरक्षा प्रदान करता है।




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