तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने 24 सितंबर, 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 79वें सत्र में बेहद कड़ा और स्पष्ट भाषण दिया। उन्होंने गाजा में नागरिकों की मौत और लेबनान पर हो रहे हमलों को रोकने में विफल रहने पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तीखी आलोचना की और कहा कि वैश्विक संस्था अपनी विश्वसनीयता खो चुकी है।
मंच से गाजा के विध्वंस की तस्वीरें दिखाते हुए एर्दोगन ने ऐतिहासिक तुलनाएं कीं और कहा कि सैन्य हमलों पर अंतरराष्ट्रीय चुप्पी 1930 के दशक के यूरोप की याद दिलाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिमी देशों के राजनीतिक और सैन्य समर्थन ने इजरायली नेतृत्व को अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही से बचा रखा है।
वैश्विक संस्था की विफलता की निंदा और दंडात्मक कदमों की मांग
एर्दोगन ने सीधे सुरक्षा परिषद के सदस्यों से सवाल किया कि आखिर कितने और बेकसूरों की मौत के बाद अनिवार्य प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि मानवीय सहायता रोकने और अंधाधुंध हमलों के कारण गाजा बच्चों का कब्रिस्तान बन चुका है।
लेबनान की स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने इजरायली हवाई हमलों की निंदा की और कहा कि आत्मरक्षा के नाम पर लेबनान की क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
“संयुक्त राष्ट्र प्रणाली अपनी ही निष्क्रियता के बोझ तले ढह रही है। गाजा में केवल बच्चे ही नहीं मर रहे हैं; उनके साथ-साथ पूरी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था दम तोड़ रही है।”
सुरक्षा परिषद में सुधार और क्षेत्रीय संप्रभुता की वकालत
अपने प्रसिद्ध राजनयिक नारे 'दुनिया पांच से बड़ी है' को दोहराते हुए एर्दोगन ने सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों की वीटो शक्ति को समाप्त करने और विकासशील देशों को उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग दोहराई।
एर्दोगन ने अपने भाषण के अंत में तुरंत युद्धविराम लागू करने, गाजा में मानवीय मदद की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने और 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र की मान्यता की अपील की।




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