मैक्सिको की पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में 1 अक्टूबर को शपथ लेने जा रहीं क्लाउडिया शीनबाम ने एक सार्वजनिक पत्र जारी कर स्पष्ट किया कि स्पेन के राजा फेलिप षष्ठम को समारोह में आमंत्रित क्यों नहीं किया गया। यद्यपि स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज को औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था, लेकिन सम्राट को आमंत्रित न किए जाने पर स्पेन ने शपथ ग्रहण का पूर्ण राजनयिक बहिष्कार करने की घोषणा की है।

शीनबाम ने अपने पत्र में याद दिलाया कि यह गतिरोध 2019 में तत्कालीन राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज ओब्रेडोर द्वारा स्पेनिश राजशाही को भेजे गए एक पत्र से शुरू हुआ था। उस पत्र में 16वीं शताब्दी में स्पेनिश विजय के दौरान मैक्सिको के मूल निवासियों पर किए गए अत्याचारों के लिए औपचारिक माफी और ऐतिहासिक समाधान की मांग की गई थी।

ऐतिहासिक आघात और 2019 के औपचारिक पत्र की अनदेखी

शीनबाम ने खेद व्यक्त किया कि स्पेनिश क्राउन ने मैक्सिको के राष्ट्राध्यक्ष को कोई औपचारिक उत्तर नहीं दिया, बल्कि पत्र को मीडिया में लीक कर दिया गया और खारिज करने वाले बयान जारी किए गए, जिसे मैक्सिको ने अपने राष्ट्रीय स्वाभिमान के विरुद्ध माना।

नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि मैक्सिको और स्पेन के बीच गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध हैं, लेकिन संप्रभु राष्ट्रों के बीच पारस्परिक सम्मान अनिवार्य है।

“जब आप गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध साझा करते हैं, तो सम्मान आवश्यक होता है। मैक्सिको के राष्ट्राध्यक्ष को जवाब न दिए जाने को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

मैड्रिड का कड़ा विरोध और समारोह का पूर्ण बहिष्कार

स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने मैक्सिको के इस निर्णय को 'अस्वीकार्य और समझ से परे' बताया। इसके बाद स्पेन के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि स्पेन सरकार का कोई भी प्रतिनिधि मैक्सिको सिटी में होने वाले शपथ ग्रहण में भाग नहीं लेगा।

इस कदम से स्पष्ट होता है कि शीनबाम पूर्ववर्ती सरकार की स्वाभिमानी विदेश नीति को आगे बढ़ाएंगी और औपनिवेशिक विरासत के ऐतिहासिक मुद्दों पर कड़ा रुख बनाए रखेंगी।

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