सिलिकॉन वैली की ऐतिहासिक सेमीकंडक्टर दिग्गज कंपनी इंटेल कॉर्प के भविष्य को लेकर कॉर्पोरेट जगत में हलचल तेज हो गई है। वैश्विक परिसंपत्ति प्रबंधन फर्म अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट ने इंटेल में 5 अरब डॉलर तक के इक्विटी-समान निवेश की पेशकश की है। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब मोबाइल चिप निर्माता क्वालकॉम ने इंटेल के अधिग्रहण की संभावनाओं पर बातचीत शुरू की थी।
अपोलो की यह पहल इंटेल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पैट गेलसिंगर और कंपनी के निदेशक मंडल के लिए एक बड़ा रणनीतिक समर्थन मानी जा रही है। क्वालकॉम के साथ पूर्ण विलय में अमेरिका, यूरोप और चीन में भारी प्रतिस्पर्धा रोधी जांच का जोखिम था, जबकि अपोलो का निवेश कंपनी को अपनी स्वायत्तता बनाए रखने की अनुमति देगा।
अधिग्रहण की चर्चाओं के बीच मिला वैकल्पिक पूंजी सहारा
इंटेल अपने 56 साल के इतिहास के सबसे बड़े वित्तीय और परिचालन संकट से जूझ रही है। दूसरी तिमाही में अरबों डॉलर के घाटे के बाद कंपनी ने 15,000 कर्मचारियों की छंटनी, दशकों पुराने लाभांश को बंद करने और अपने विनिर्माण (फाउंड्री) व्यवसाय को एक अलग सहायक कंपनी बनाने की घोषणा की थी।
गेलसिंगर की पुनर्उद्धार योजना की सबसे अहम कड़ी 18A विनिर्माण प्रक्रिया है, जिसे 2025 में बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक रूप से शुरू किया जाना है। हालांकि, ओहियो और जर्मनी में नई उन्नत चिप फैक्ट्रियों के निर्माण के लिए भारी पूंजी की आवश्यकता है, जिससे कंपनी की नकदी पर भारी दबाव था।
“अपोलो से इक्विटी पूंजी मिलना इंटेल के लिए किसी विघटनकारी कॉर्पोरेट बिक्री की तुलना में एक महत्वपूर्ण विकल्प है। 18A चिप नोड के इस निर्णायक दौर में यह कंपनी को नई मजबूती देगा।”
फाउंड्री विनिर्माण की भारी लागत और लेक्सलिप साझेदारी
अपोलो पहले से ही इंटेल की वित्तीय संरचना से अच्छी तरह वाकिफ है। जून 2024 में अपोलो ने आयरलैंड के लेक्सलिप में इंटेल के फैब 34 कारखाने को नियंत्रित करने वाली संयुक्त उद्यम इकाई में 49% इक्विटी हिस्सेदारी के लिए 11 अरब डॉलर का निवेश किया था।
वार्ता से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इंटेल का निदेशक मंडल अपोलो के इस प्रस्ताव के आकार, संरचना और शर्तों पर गंभीरता से विचार कर रहा है। यह घटनाक्रम दिखाता है कि मुश्किलों के बावजूद अमेरिका के सबसे बड़े चिप निर्माता में संस्थागत निवेशकों का भरोसा कायम है।




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