फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र को संबोधित करते हुए वैश्विक नेताओं के समक्ष भावनात्मक और कड़ा संदेश दिया। गाजा में भारी मानवीय संकट और वेस्ट बैंक में बढ़ते तनाव के बीच मंच संभालते हुए अब्बास ने तीन बार दृढ़ स्वर में दोहराया: 'हम अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे। हम अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे। हम अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे। फिलिस्तीन हमारी मातृभूमि है।'
अपने विस्तृत भाषण में 88 वर्षीय नेता ने गाजा में आम नागरिकों पर हो रहे हमलों और आधारभूत ढांचे के विनाश की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि लाखों लोग बार-बार विस्थापन, भुखमरी और चिकित्सा सुविधाओं के अभाव का सामना करने पर मजबूर हुए हैं, जो असहनीय मानवीय त्रासदी है।
विस्थापन का कड़ा विरोध और गाजा में तबाही की निंदा
अब्बास ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासभा से केवल प्रस्ताव पारित करने के बजाय ठोस कार्रवाई करने का आह्वान किया। उन्होंने संपूर्ण फिलिस्तीनी क्षेत्र से इजरायली सेना की तत्काल वापसी और स्थायी युद्धविराम की मांग दोहराई।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इजरायल को हथियारों की आपूर्ति पर तत्काल प्रतिबंध लगाने और वेस्ट बैंक में हिंसक बस्तियां बसाने वाले चरमपंथी समूहों पर कड़े प्रतिबंध लगाने की अपील की।
“फिलिस्तीन आजाद होगा। यह हमारी मातृभूमि है, हमारे पूर्वजों की धरती है, और हमारे लोग इस पर हमेशा अडिग और दृढ़ रहेंगे।”
हथियार प्रतिबंध और संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण सदस्यता की मांग
राजनयिक समाधान की वकालत करते हुए अब्बास ने कहा कि फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (पीएलओ) ही फिलिस्तीनी जनता का एकमात्र वैध प्रतिनिधि है, जो स्वतंत्र राष्ट्र के तहत गाजा और वेस्ट बैंक में प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार है।
उन्होंने विश्व के सभी देशों से फिलिस्तीन राज्य को अविलंब औपचारिक मान्यता देने और संयुक्त राष्ट्र में पूर्ण सदस्यता प्रदान करने की अपील की, ताकि पश्चिम एशिया में स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त हो सके।




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