श्रीलंका के राजनीतिक इतिहास में एक युगांतरकारी अध्याय की शुरुआत करते हुए राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने 24 सितंबर 2026 को प्रतिष्ठित शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. हरिनी अमरसूर्या को देश की 16वीं प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई। राष्ट्रपति चुनाव में दिसानायके की ऐतिहासिक जीत के बाद हुए इस बदलाव से पिछले चौबीस वर्षों में पहली बार किसी महिला ने कोलंबो में सरकार की कमान संभाली है।
कोलंबो स्थित राष्ट्रपति सचिवालय में आयोजित एक सादे समारोह में डॉ. अमरसूर्या ने एक संक्षिप्त अंतरिम मंत्रिमंडल के साथ पदभार ग्रहण किया। वह सिरिमावो भंडारनायके—जो 1960 में दुनिया की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थीं और जिन्होंने अंतिम बार वर्ष 2000 में पद संभाला था—तथा उनकी पुत्री चंद्रिका कुमारतुंगा के बाद यह पद संभालने वाली श्रीलंका की तीसरी महिला हैं। नई सरकार ने सादगी और वित्तीय अनुशासन की मिसाल पेश करते हुए शपथ ग्रहण समारोह में किसी भी प्रकार के अनावश्यक आडंबर से परहेज किया।
ऐतिहासिक शपथ ग्रहण और एक शिक्षाविद का सत्ता के शीर्ष पर उभार
समाजशास्त्र की विख्यात प्रोफेसर और नागरिक अधिकारों की पैरोकार डॉ. अमरसूर्या का राजनीतिक सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। 2020 में नेशनल पीपुल्स पावर (NPP) की राष्ट्रीय सूची से संसद में प्रवेश करने से पहले वह ओपन यूनिवर्सिटी ऑफ श्रीलंका के सामाजिक अध्ययन विभाग में वरिष्ठ व्याख्याता थीं। एडिनबर्ग विश्वविद्यालय से सामाजिक मानव विज्ञान में डॉक्टरेट उपाधि प्राप्त अमरसूर्या ने शिक्षा में समानता, बाल कल्याण और लैंगिक न्याय पर दशकों तक शोध और जमीनी कार्य किया है।
शपथ ग्रहण के कुछ ही घंटों बाद राष्ट्रपति दिसानायके ने 225 सदस्यीय संसद को तत्काल प्रभाव से भंग करने का असाधारण राजपत्र जारी कर दिया और 14 नवंबर 2026 को नए आम चुनाव कराने की घोषणा की। मौजूदा संसद में एनपीपी के पास केवल तीन सीटें थीं, जिसके चलते भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों और कल्याणकारी सुधारों को पारित कराने के लिए संसद में स्पष्ट बहुमत हासिल करना अनिवार्य माना जा रहा था। अक्टूबर की शुरुआत में नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी।
“हमारे प्रशासन पर देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने, पारदर्शिता बहाल करने और एक समावेशी शासन मॉडल तैयार करने की गहरी जिम्मेदारी है, जो प्रत्येक श्रीलंकाई नागरिक की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करे।”
संसद भंग, 14 नवंबर को मध्यावधि चुनाव और आर्थिक चुनौतियां
अंतरिम सरकार के सामने 2022 के गंभीर आर्थिक संकट और संप्रभु ऋण चूक के बाद की व्यवस्था को सुदृढ़ करने की तात्कालिक चुनौती है। प्रधानमंत्री अमरसूर्या और उनकी आर्थिक सलाहकार टीम को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ 2.9 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज की शर्तों की समीक्षा करनी होगी, ताकि गरीब और मध्यम वर्ग पर करों का अत्यधिक बोझ कम करते हुए विदेशी ऋणदाताओं के साथ ऋण पुनर्गठन प्रक्रिया को सुचारू रखा जा सके।
इस नियुक्ति का देश के नागरिक समाज, युवा आंदोलनों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों ने सकारात्मक स्वागत किया है। भारत सहित दक्षिण एशियाई पड़ोसियों और पश्चिमी देशों ने श्रीलंका में शांतिपूर्ण और संवैधानिक सत्ता हस्तांतरण की सराहना की है। नवंबर के आम चुनावों के मद्देनजर, डॉ. अमरसूर्या की स्वच्छ छवि और बौद्धिक साख एनपीपी गठबंधन को एक मजबूत राजनीतिक आधार प्रदान करती है।




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