पेरू की सरकार ने मंगलवार को राजधानी लीमा और पड़ोसी प्रांत कैलाओ के 12 प्रमुख जिलों में 60 दिनों के आपातकाल की घोषणा की। यह कदम राजधानी के सार्वजनिक परिवहन तंत्र को निशाना बनाने वाले हिंसक रंगदारी सिंडिकेट्स और भाड़े के हत्यारों से निपटने के लिए उठाया गया है। आपातकाल के दौरान व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सभा करने के अधिकार और घरों की तलाशी से जुड़े कुछ संवैधानिक अधिकारों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है।

यह संकट तब गहराया जब आपराधिक गिरोहों ने बस ऑपरेटरों से प्रति वाहन 10 से 50 सोल प्रतिदिन तक की रंगदारी मांगनी शुरू की। रंगदारी देने से इनकार करने पर बदमाशों ने दिनदहाड़े गोलीबारी की, जिसमें तीन बस चालकों की मौत हो गई और कई यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए।

आपराधिक गिरोहों का कहर और राजधानी में थमी बसों की रफ्तार

इस हिंसा और जानलेवा हमलों के विरोध में बस चालकों और यूनियनों ने सोमवार और मंगलवार को काम बंद कर दिया, जिससे समूची राजधानी का परिवहन तंत्र चरमरा गया। बस अड्डों पर हजारों की संख्या में यात्री फंसे रहे और स्थिति को देखते हुए विश्वविद्यालयों और स्कूलों को ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने का आदेश देना पड़ा।

पेरू के प्रधानमंत्री गुस्तावो एड्रिएनज़ेन ने घोषणा की कि सशस्त्र सेनाओं को तुरंत राष्ट्रीय पुलिस के साथ तैनात किया जा रहा है। सैनिक प्रमुख बस डिपो, स्टॉप और राजमार्गों पर गश्त करेंगे ताकि यात्री बसों का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित हो सके।

“हम आपराधिक गिरोहों को अपने परिवहन कर्मियों और नागरिकों को बंधक नहीं बनाने देंगे। सुरक्षा बहाल करने और इन सिंडिकेट्स को खत्म करने के लिए सशस्त्र बल और पुलिस सभी परिवहन गलियारों में तैनात रहेगी।”

सड़कों पर सेना की तैनाती और 'शहरी आतंकवाद' कानून का प्रस्ताव

आंतरिक मंत्री जुआन जोस सैंतिवेनेज़ ने बताया कि आपराधिक जांच शाखा (डीआईआरआईएनसीआरआई) के भीतर एक विशेष एंटी-एक्सटॉर्शन टास्क फोर्स गठित की गई है, जो विशेष रूप से जेलों से चलने वाले अवैध फोन कॉल्स और गिरोहों पर शिकंजा कसेगी।

दीना बोलुआर्ते सरकार ने संसद को एक आपातकालीन विधेयक भी भेजा है, जिसमें रंगदारी, अपहरण और भाड़े पर हत्याओं को 'शहरी आतंकवाद' के तहत वर्गीकृत करने और आजीवन कारावास का प्रावधान करने का प्रस्ताव है। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि जेलों और न्यायपालिका में सुधार किए बिना इस समस्या का स्थायी समाधान मुश्किल है।

Sources