अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के हरे संगमरमर वाले पोडियम से विश्व नेताओं को अपना अंतिम औपचारिक संबोधन दिया। अमेरिकी सार्वजनिक जीवन में पांच दशकों से अधिक के अपने सफर के समापन पर बाइडन ने बहुपक्षीय सहयोग और सामूहिक सुरक्षा का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने कहा कि निरंकुश आक्रामकता और वैश्विक अस्थिरता के खिलाफ लोकतांत्रिक साझेदारियां मानवता का सबसे मजबूत आधार हैं।

शीत युद्ध से लेकर महामारी के बाद के दौर तक के ऐतिहासिक मोड़ों को याद करते हुए बाइडन ने प्रतिनिधियों से कहा कि जब राष्ट्र संकीर्ण राष्ट्रवाद के बजाय साझे मूल्यों को चुनते हैं, तो बड़ी से बड़ी वैश्विक चुनौतियों का समाधान संभव होता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत स्थापित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को एकतरफा स्वार्थों के लिए कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।

यूक्रेन की संप्रभुता की रक्षा और पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की अपील

यूरोपीय सुरक्षा पर बोलते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस के अवैध आक्रमण के खिलाफ यूक्रेन की रक्षा के लिए वाशिंगटन की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। बाइडन ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के मुख्य सैन्य उद्देश्य विफल हो चुके हैं, जबकि नाटो पहले से कहीं अधिक बड़ा, मजबूत और एकजुट है। उन्होंने दुनिया से आग्रह किया कि वे संघर्ष से न थकें, क्योंकि यूक्रेन की संप्रभुता को कुचलने की अनुमति देना अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की पवित्रता को खतरे में डाल देगा।

बाइडन ने पश्चिम एशिया के गंभीर संकटों पर भी चर्चा की। उन्होंने इजरायल और हमास के बीच तत्काल युद्धविराम और बंधकों की रिहाई का आह्वान किया, साथ ही एक स्वतंत्र फलस्तीनी राष्ट्र के निर्माण के लिए व्यावहारिक मार्ग तैयार करने की आवश्यकता बताई। इजरायल-लेबनान सीमा पर बढ़ते सैन्य टकराव के बीच राष्ट्रपति ने दोहराया कि पूर्ण युद्ध किसी के हित में नहीं है और कूटनीति ही स्थायी क्षेत्रीय शांति की एकमात्र राह है।

“सत्ता में बने रहने से भी ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ चीजें होती हैं। वह है आपकी जनता। हमें कभी नहीं भूलना चाहिए कि हम यहां किसकी सेवा के लिए हैं और लोकतंत्र की रक्षा करना हमारा सामूहिक कर्तव्य है।”

लोकतंत्र, शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण और सत्ता का वास्तविक उद्देश्य

भाषण के एक भावुक क्षण में बाइडन ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव से हटने के अपने फैसले का जिक्र किया और इसे अमेरिकी लोकतांत्रिक परंपराओं का प्रमाण बताया। उन्होंने दुनिया भर के नेताओं से आग्रह किया कि वे जनसेवा को अपना विशेषाधिकार नहीं बल्कि सार्वजनिक अमानत समझें। बाइडन ने कहा कि किसी भी नेता को अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए नागरिकों के अधिकारों और लोकतांत्रिक मर्यादाओं की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।

महासभा कक्ष में उपस्थित राष्ट्राध्यक्षों और राजनयिकों ने बाइडन के इस विदाई संबोधन का देर तक तालियां बजाकर स्वागत किया। अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों ने इसे बहुपक्षीय सहयोग और नियम-आधारित व्यवस्था की मजबूत वकालत बताया, जो वर्तमान समय में बढ़ रहे लोकलुभावनवाद और अलगाववाद के दौर में एक महत्वपूर्ण दिशा प्रदान करता है।

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