कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने 24 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 79वें सत्र में एक अत्यंत भावुक और तीखा भाषण दिया, जिसमें उन्होंने दुनिया भर के नेताओं और बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों से उस आर्थिक व्यवस्था को बदलने का आह्वान किया जो ग्रह को तबाही की ओर धकेल रही है। संयुक्त राष्ट्र मंच से बोलते हुए पेट्रो ने स्पष्ट किया कि जलवायु संकट केवल एक तकनीकी समस्या नहीं है, बल्कि अनियंत्रित वैश्विक पूंजी और जीवन रक्षा के बीच का एक अस्तित्वगत संघर्ष है।

पेट्रो के संबोधन का मुख्य आधार विकासशील देशों के लिए संप्रभु ऋण पुनर्गठन का एक महत्वाकांक्षी प्रस्ताव था। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक से ऋण-के-बदले-जलवायु-कार्य स्वैप की व्यवस्था लागू करने का आग्रह किया, ताकि लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और एशिया के देश भारी कर्ज अदायगी के स्थान पर उस धनराशि का उपयोग वनों की कटाई रोकने, नवीकरणीय ऊर्जा और पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली में कर सकें।

अमेज़न वर्षावन और धरती के संरक्षण के लिए वैश्विक ऋण का पुनर्गठन

पेट्रो ने विकसित देशों और बहुराष्ट्रीय तेल कंपनियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि वे वित्तीय मुनाफे के लालच में जीवाश्म ईंधनों की खपत को बढ़ावा देकर पृथ्वी के पर्यावरण को नष्ट कर रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि कोलंबिया ने तेल और गैस के नए अन्वेषण अनुबंधों पर पूर्ण रोक लगाने का साहसिक कदम उठाया है, और अमीर औद्योगिक देशों को भी कोयला तथा पेट्रोलियम के खनन और उपयोग को तत्काल बंद करने का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।

कोलंबियाई राष्ट्रपति ने अमेज़न वर्षावन की रक्षा को मानवता के अस्तित्व के लिए अनिवार्य बताया, जो भीषण सूखे और जंगलों की आग से जूझ रहा है। उन्होंने अपने न्यूयॉर्क भाषण को कोलंबिया के कैली शहर में आयोजित होने वाले आगामी कॉप16 संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन से जोड़ा, जहां ग्लोबल साउथ के देश जलवायु वित्त के ठोस और बाध्यकारी तंत्र स्थापित करने के लिए विकसित देशों पर दबाव बनाएंगे।

“हमारे ग्रह को नष्ट करने की शक्ति वैश्विक पूंजी के हाथों में है, लेकिन पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करने की शक्ति कर्ज को वास्तविक जलवायु निवेश में बदलने की मांग करती है। हमें वित्तीय लालच के मुकाबले जीवन को चुनना होगा।”

जीवाश्म ईंधन खनन पर रोक, कैली कॉप16 सम्मेलन और वैश्विक प्रतिक्रिया

पेट्रो के भाषण पर संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधियों और वैश्विक पर्यावरण कार्यकर्ताओं की ओर से जबरदस्त समर्थन देखने को मिला। विकासशील देशों ने इस बात की सराहना की कि पेट्रो ने अंतरराष्ट्रीय ऋण के उस दुष्चक्र पर खुलकर बात की, जो गरीब देशों को जलवायु संकट से निपटने के बजाय साहूकारों का कर्ज चुकाने के लिए मजबूर करता है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने ऐसे व्यापक ऋण समाधानों के प्रति वित्तीय जोखिम की आशंका जताई।

कोलंबिया के घरेलू राजनीतिक हलकों में विपक्षी दलों और उद्योग जगत ने राष्ट्रपति के आक्रामक रुख पर चिंता जताई और कहा कि तेल खनन रोकने से सरकारी राजस्व पर नकारात्मक असर पड़ेगा। इसके बावजूद पेट्रो अपने फैसले पर अडिग रहे और कहा कि जब धरती ही खतरे में हो तो पारंपरिक आर्थिक सिद्धांतों का कोई औचित्य नहीं रह जाता। उनका यह संबोधन आगामी पर्यावरण सम्मेलनों में कोलंबिया को एक प्रमुख वैश्विक आवाज बनाता है।

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