न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र में रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में विश्व नेताओं ने एक ऐतिहासिक राजनीतिक घोषणा को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी। यह समझौता दवा प्रतिरोधी बैक्टीरिया और सुपरबग के बढ़ते वैश्विक खतरे से निपटने के लिए पहली बार ठोस और मापने योग्य लक्ष्य निर्धारित करता है।
घोषणा पत्र के तहत सदस्य देशों ने 2030 तक जीवाणु रोगाणुरोधी प्रतिरोध से होने वाली मानव मौतों में वैश्विक स्तर पर कम से कम 10 प्रतिशत की कमी लाने का संकल्प लिया। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि ठोस कदम न उठाए गए, तो 2050 तक प्रतिवर्ष एक करोड़ से अधिक लोग सुपरबग के कारण जान गंवा सकते हैं।
2030 तक सुपरबग से होने वाली मौतों में 10% कमी का बाध्यकारी लक्ष्य
इस समझौते के तहत निम्न और मध्यम आय वाले देशों की सहायता के लिए कम से कम 10 करोड़ डॉलर का वित्तीय कोष स्थापित किया जाएगा, जिससे प्रयोगशालाओं की क्षमता बढ़ेगी और सटीक डायग्नोस्टिक परीक्षण संभव हो सकेंगे।
घोषणा पत्र में पशुपालन और कृषि क्षेत्र में एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध उपयोग पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। स्वस्थ पशुओं के विकास को बढ़ावा देने के लिए इंसानों के इलाज में प्रयुक्त महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगाने की सहमति बनी है।
“रोगाणुरोधी प्रतिरोध हमारे समय के सबसे गंभीर स्वास्थ्य संकटों में से एक है। यह घोषणा साबित करती है कि विश्व नेता अंततः सुपरबग को उतनी ही गंभीरता से ले रहे हैं जितनी आवश्यकता है।”
कैटेलिटिक फंडिंग और पशुधन में दवाओं के अंधाधुंध उपयोग पर रोक
घोषणा में 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण पर जोर दिया गया है, जो मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा को आपस में जोड़ता है, ताकि दवा निर्माण संयंत्रों से नदियों में होने वाले प्रदूषण को रोका जा सके।
डब्ल्यूएचओ और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने इस घोषणा को आधुनिक चिकित्सा की जीवनरक्षक क्षमता को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की दिशा में ऐतिहासिक मोड़ करार दिया है।




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