उपभोक्ता अधिकारों को मजबूत करने और तेजी से बढ़ते ई-कचरे पर नियंत्रण पाने के लिए भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग ने नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय राष्ट्रीय परामर्श बैठक आयोजित की। इस बैठक में स्मार्टफोन और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के लिए एक अनिवार्य 'रिपेयरेबिलिटी इंडेक्स' (मरम्मत सुगमता सूचकांक) लागू करने की रूपरेखा पेश की गई। इस नियामक तंत्र का उद्देश्य गैजेट्स को 1 से 5 तक की रेटिंग देना है ताकि खरीदारों को यह पता चल सके कि कोई उत्पाद कितनी आसानी से सुधारा जा सकता है।
परामर्श सत्र में वरिष्ठ नीति निर्माताओं, उपभोक्ता संरक्षण संगठनों, प्रमुख स्मार्टफोन निर्माताओं (ओईएम) और स्वतंत्र रिपेयर संघों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। विमर्श का मुख्य केंद्र ऐसे मानक तय करना रहा जो भ्रामक विज्ञापनों और 'नियोजित अप्रचलन' (प्लांड ऑब्सोलेसेंस) पर रोक लगा सकें। कंपनियों द्वारा जानबूझकर स्पेयर पार्ट्स या सॉफ्टवेयर अपडेट सीमित करने की प्रथा को समाप्त करने के लिए तैयार इस मसौदे के तहत निर्माताओं को उत्पाद पैकेजिंग और ऑनलाइन बिक्री मंचों पर यह स्कोर प्रमुखता से दिखाना होगा।
1 से 5 अंकों की रेटिंग प्रणाली और कंपनियों की जवाबदेही
यह रेटिंग प्रणाली पांच प्रमुख आधारों पर उत्पादों का परीक्षण करेगी: विस्तृत रिपेयर मैनुअल और डायग्नोस्टिक टूल्स की उपलब्धता, विशेष उपकरणों के बिना आसानी से पुर्जे अलग करने की सुविधा, बाजार में असली स्पेयर पार्ट्स की दीर्घकालिक उपलब्धता, पुर्जों की पारदर्शी कीमतें और अनिवार्य सॉफ्टवेयर अपडेट की समयसीमा। उपभोक्ता संगठनों का आरोप रहा है कि कंपनियों द्वारा स्क्रीन और बैटरी के अत्यधिक दाम रखे जाने से ग्राहक मजबूरन नया फोन खरीद लेते हैं।
बैठक में फ्रांस के प्रसिद्ध रिपेयरेबिलिटी इंडेक्स और यूरोपीय संघ के सर्कुलर इकोनॉमी नियमों का उदाहरण प्रस्तुत किया गया। भारतीय अधिकारियों ने रेखांकित किया कि विश्व का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार होने के कारण भारत में सालाना 17 लाख टन से अधिक इलेक्ट्रॉनिक कचरा पैदा होता है। स्वतंत्र रिपेयररों और स्थानीय मरम्मत बाजार को कानूनी रूप से सशक्त बनाना रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए अपरिहार्य है।
“उपभोक्ताओं को अपने गैजेट्स किफायती दरों पर ठीक कराने का बुनियादी अधिकार है, उन्हें नियोजित अप्रचलन का शिकार नहीं बनाया जा सकता। यह इंडेक्स खरीदारों को सशक्त करेगा और राष्ट्रव्यापी ई-कचरे को घटाएगा।”
ई-कचरा नियंत्रण, उद्योग की चिंताएं और वैश्विक मानक
यद्यपि तकनीकी कंपनियों और उद्योग संगठनों ने पारदर्शिता के उद्देश्य का समर्थन किया, लेकिन उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकारों, अनधिकृत बैटरी बदलाव के दौरान सुरक्षा जोखिमों और अनुपालन लागत को लेकर कुछ चिंताएं भी जाहिर कीं। इसके जवाब में मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिसमें सबसे पहले प्रीमियम और मिड-रेंज स्मार्टफोन शामिल होंगे और बाद में टैबलेट, लैपटॉप व घरेलू उपकरणों को जोड़ा जाएगा।
उपभोक्ता मामले विभाग इस नए सूचकांक को अपने मौजूदा राष्ट्रीय 'राइट टू रिपेयर' पोर्टल के साथ एकीकृत करने की तैयारी कर रहा है, जहां पहले से ही अधिकृत सेवा केंद्रों और रिपेयर गाइड की जानकारी उपलब्ध है। आगामी तिमाही में अंतिम दिशानिर्देश जारी होने की संभावना है, जिसे पर्यावरणविदों और उपभोक्ता संरक्षकों ने भारत की बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था में एक ऐतिहासिक सुधार बताया है।




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