मैक्सिको की संसद (कैमरा डी डिपुटाडोस) ने बुधवार को देश के संविधान के अनुच्छेद 2 में एक युगांतरकारी संशोधन को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी। इस ऐतिहासिक सुधार के तहत मैक्सिको के स्वदेशी लोगों और एफ्रो-मैक्सिकन समुदायों को सार्वजनिक कानून के तहत पूर्ण कानूनी व्यक्तित्व और सामूहिक अधिकारों से संपन्न स्वायत्त दर्जा प्रदान किया गया है।

सभी राजनीतिक दलों के 492 सांसदों के समर्थन से पारित यह सुधार 1996 के सैन एंड्रेस समझौतों से जुड़े ऐतिहासिक नैतिक वादों को पूरा करता है। पिछली दो शताब्दियों से मैक्सिकन कानून में इन मूल समुदायों को स्वशासी संस्थाओं के बजाय केवल 'सार्वजनिक संरक्षण का पात्र' माना जाता था।

संरक्षण की वस्तु से सार्वजनिक कानून के संप्रभु विषय तक

नए संवैधानिक ढांचे के तहत मैक्सिको के 68 मूल जनजातीय राष्ट्रों और एफ्रो-वंशज आबादी को अपनी परंपराओं के अनुसार न्याय प्रशासन, पारंपरिक शासन व्यवस्था के तहत प्रतिनिधियों के चुनाव तथा अपनी पैतृक भाषाओं और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का अधिकार प्राप्त हो गया है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस संशोधन के बाद स्वदेशी क्षेत्रों में किसी भी खनन रियायत, राजमार्ग निर्माण या बुनियादी ढांचा परियोजना को शुरू करने से पहले स्थानीय समुदायों की 'स्वतंत्र, पूर्व और सूचित सहमति' लेना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। परियोजनाओं से होने वाले लाभ में समुदायों की हिस्सेदारी भी सुनिश्चित की गई है।

“यह सुधार हमारे पूर्वजों के प्रति एक पावन ऐतिहासिक ऋण चुकाता है; यह हमारे स्वदेशी लोगों को दया के पात्र के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र के संप्रभु निर्माताओं के रूप में मान्यता देता है।”

प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और प्रत्यक्ष वित्तीय अधिकार

संविधान संशोधन में यह अनिवार्य किया गया है कि संघीय, प्रांतीय और नगरपालिका सरकारें सीधे सामुदायिक परिषदों को वित्तीय बजट आवंटित करेंगी। बिचौलियों के हटने से जनजातीय प्रतिनिधि अपनी जरूरत के अनुसार स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और पेयजल परियोजनाओं का निर्माण स्वयं कर सकेंगे।

सीनेट और प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा अनुसमर्थन के बाद यह कानून नवनिर्वाचित राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम के कार्यकाल में पूर्ण रूप से लागू होगा, जिन्होंने स्वदेशी अधिकारों को मैक्सिकन लोकतंत्र का आधार स्तंभ बनाने का संकल्प लिया है।

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