फ्रांस के प्रधानमंत्री मिशेल बार्नियर ने अपने नव नियुक्त अर्थव्यवस्था और वित्त मंत्री एंटोनी आर्मंड के साथ मिलकर वर्ष 2025 के लिए एक अत्यंत कड़े बजट की रूपरेखा तैयार कर ली है। यूरोज़ोन में देश की वित्तीय साख को खतरे में डालने वाले बेतहाशा बढ़ते राजकोषीय घाटे को देखते हुए मैटिग्नॉन सरकार सरकारी खर्च में भारी कटौती और बड़े निगमों पर नए कर लगाने जा रही है।
अक्टूबर की शुरुआत में नेशनल असेंबली में पेश किए जाने वाले इस वित्तीय विधेयक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों, राज्य एजेंसियों और स्वास्थ्य क्षेत्र के आवंटन में लगभग 40 अरब यूरो की बचत करना है। बिना किसी ठोस कार्रवाई के फ्रांस का बजट घाटा वर्ष 2024 में सकल घरेलू उत्पाद के 6 प्रतिशत से अधिक होने का अनुमान है।
सरकारी खर्चों में कटौती और संपन्न वर्गों पर लक्षित कर
वित्तीय बोझ को संतुलित करने के लिए बार्नियर ने स्पष्ट किया है कि मध्यम वर्ग पर करों का बोझ डाले बिना बहुराष्ट्रीय कंपनियों के अत्यधिक मुनाफे और अति-धनाढ्य नागरिकों पर अस्थायी विशेष कर लगाए जा सकते हैं।
अर्थव्यवस्था मंत्री आर्मंड ने सभी मंत्रालयों को संरचनात्मक बचत करने और नई नियुक्तियों पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही स्थानीय और प्रांतीय निकायों को भी राष्ट्रीय वित्तीय अनुशासन में योगदान देना होगा।
“Our public finances are on a knife edge. Rebuilding budgetary sovereignty is an imperative of national dignity; we cannot pass mountain of debt to our children.”
संसदीय बहुमत की कमी और यूरोपीय संघ की निगरानी
संसद में इस बजट को पारित कराना बार्नियर के लिए सबसे कठिन परीक्षा होगी। नेशनल असेंबली में किसी भी दल के पास पूर्ण बहुमत नहीं है और वामपंथी न्यू पॉपुलर फ्रंट तथा धुर-दक्षिणपंथी नेशनल रैली के कड़े विरोध के बीच सरकार पर लगातार अविश्वास प्रस्ताव का खतरा मंडरा रहा है।
इसके अतिरिक्त, यूरोपीय संघ ने भी अत्यधिक घाटे के उल्लंघन को लेकर फ्रांस के खिलाफ आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। फ्रांस को अक्टूबर के मध्य तक यूरोपीय आयोग को एक विश्वसनीय वित्तीय सुधार योजना सौंपनी होगी, जहां उसका सार्वजनिक ऋण जीडीपी के 112 प्रतिशत के करीब पहुंच चुका है।




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