फ्रांस के नवनियुक्त प्रधानमंत्री मिशेल बार्नियर ने 24 सितंबर 2026 को पेरिस स्थित एलिसी पैलेस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ अपनी नवगठित सरकार की पहली औपचारिक मंत्रिपरिषद बैठक की अध्यक्षता की। आसमान छूते सार्वजनिक कर्ज और लड़खड़ाते सरकारी खजाने के गंभीर संकट के बीच बार्नियर ने मंत्रियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि देश के अस्तित्व की खातिर सभी मंत्रालयों को तत्काल प्रभाव से कड़ा वित्तीय अनुशासन और खर्चों में भारी कटौती लागू करनी होगी।
यह उद्घाटन बैठक अत्यधिक राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में हुई, जब गर्मियों के मध्यावधि संसदीय चुनावों के बाद नेशनल असेंबली तीन विरोधी गुटों में बंट गई और कोई भी दल पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर सका। बार्नियर की कंजर्वेटिव रिपब्लिकन्स और मैक्रों समर्थक मध्यमार्गी गठबंधन की सरकार संसद में अल्पमत में है। इस नाजुक स्थिति को समझते हुए अनुभवी राजनयिक बार्नियर ने कहा कि जनविश्वास दोबारा हासिल करने का एकमात्र उपाय वास्तविकता को स्वीकार करना और पारदर्शी शासन देना है।
वित्तीय संकट का कगार और 2025 के बजट की जटिल चुनौती
कैबिनेट की चर्चा का मुख्य बिंदु फ्रांस का अनियंत्रित बजट घाटा रहा, जो वित्त मंत्रालय के अनुमानों के मुताबिक 2024 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 5.6% से 6.0% तक पहुंच सकता है। यह यूरोपीय संघ की निर्धारित 3.0% की सीमा से दोगुना है। 3.1 ट्रिलियन यूरो (जीडीपी का 110% से अधिक) के भारी कर्ज के कारण यूरोपीय आयोग ने फ्रांस के खिलाफ पहले ही अत्यधिक घाटा प्रक्रिया शुरू कर दी है। वित्त मंत्री एंटोनी अरमांड और बजट मंत्री लॉरेंट सेंट-मार्टिन ने चेतावनी दी कि यदि तुरंत कदम नहीं उठाए गए तो कर्ज पर ब्याज देश का सबसे बड़ा खर्च बन जाएगा।
क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों द्वारा फ्रांस की साख घटाए जाने के खतरे और ब्रुसेल्स के कड़े नियमों को पूरा करने के लिए बार्नियर ने सभी मंत्रालयों को 2025 के वित्त विधेयक के लिए तुरंत खर्च कटौती प्रस्ताव तैयार करने को कहा। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यद्यपि अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले सामान्य करों में वृद्धि नहीं की जाएगी, लेकिन अति-धनाढ्य व्यक्तियों और भारी मुनाफा कमाने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर विशेष अंशदान लगाया जा सकता है।
“हमारे राष्ट्र की बजटीय स्थिति अत्यंत गंभीर है। मैं किसी आसान भ्रम या बिना वित्तीय आधार वाले वादों में नहीं उलझूंगा; हमारे सामूहिक अस्तित्व के लिए फ्रांसीसी जनता के साथ सत्य और अनुशासन आवश्यक है।”
संसद में नाजुक स्थिति और यूरोपीय संघ की कड़ी निगरानी
इस आर्थिक संकट के अलावा सरकार को संसद के निचले सदन (पैलिस बॉर्बन) में गंभीर अस्तित्ववादी संकट का सामना करना पड़ रहा है। वामपंथी गठबंधन न्यू पॉपुलर फ्रंट ने बार्नियर की नियुक्ति को जनादेश का उल्लंघन बताते हुए तुरंत अविश्वास प्रस्ताव लाने की घोषणा की है। ऐसी स्थिति में सरकार का अस्तित्व धुर-दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन की नेशनल रैली की मौन सहमति पर टिका है, जिसने समर्थन के बदले क्रय शक्ति, आव्रजन और सुरक्षा पर अपनी शर्तें रखी हैं।
यूरोपीय वित्तीय बाजार और प्रमुख राजधानियां पेरिस के इस राजनीतिक घटनाक्रम पर पैनी नजर रख रही हैं, क्योंकि फ्रांस और जर्मनी के सरकारी बॉन्ड प्रतिफल का अंतर कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। पांचवें गणतंत्र के सबसे जटिल बजट निर्माण के इस दौर में प्रधानमंत्री बार्नियर को आर्थिक कठोरता, सामाजिक शांति और संसद में अपने अस्तित्व के बीच बेहद संवेदनशील संतुलन साधना होगा।




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