दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था से जुड़े रोजगार ने 3.5 करोड़ का अभूतपूर्व आंकड़ा छू लिया है, जिससे हरित नौकरियों ने पारंपरिक जीवाश्म ईंधन क्षेत्र को काफी पीछे छोड़ दिया है। मंगलवार को पेरिस में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) द्वारा जारी 'वर्ल्ड एनर्जी एम्प्लॉयमेंट 2024' रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है।
विस्तृत अध्ययन के अनुसार वर्ष 2024 में वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में कुल रोजगार लगभग 6.8 करोड़ रहा, जिसमें से आधे से अधिक लोग स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में कार्यरत हैं। नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में बड़े निवेश और सरकारी प्रोत्साहनों के दम पर वर्ष 2020 से अब तक इस क्षेत्र में 45 लाख से अधिक नए पद जुड़े हैं, जबकि कोयला और तेल खनन में भर्तियां लगभग स्थिर रही हैं।
सौर ऊर्जा और ईवी निर्माण से नौकरियों में आया जबर्दस्त उछाल
सौर फोटोवोल्टिक (पीवी) विनिर्माण और स्थापना कार्य रोजगार सृजन में सबसे आगे रहा, जिसने सीधे तौर पर 73 लाख से अधिक लोगों को आजीविका प्रदान की। वहीं इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी निर्माण क्षेत्र में सालाना आधार पर 15% की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें अब 50 लाख से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं।
भौगोलिक दृष्टि से चीन दुनिया में हरित ऊर्जा नौकरियों का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है, जहां विश्व के कुल स्वच्छ ऊर्जा रोजगार का लगभग 40% हिस्सा है। हालांकि अमेरिका के मुद्रास्फीति न्यूनीकरण अधिनियम (आईआरए) और यूरोपीय संघ के नए औद्योगिक नियमों से पश्चिमी देशों में भी स्थानीय स्तर पर भर्तियों में खासी तेजी आई है।
“स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ना केवल पर्यावरण की आवश्यकता नहीं है; यह विकसित और उभरती दोनों अर्थव्यवस्थाओं में रोजगार सृजन और औद्योगिक मजबूती का एक अभूतपूर्व इंजन बन चुका है।”
कुशल कामगारों की भारी कमी और न्यायसंगत बदलाव की जरूरत
इस ऐतिहासिक वृद्धि के बावजूद, आईईए ने आगाह किया है कि कुशल कामगारों की भारी कमी के कारण नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। सर्वेक्षण में शामिल 60% से अधिक निर्माण कंपनियों ने प्रमाणित इलेक्ट्रीशियनों, पावर ग्रिड इंजीनियरों और हीट पंप इंस्टालरों को खोजने में गंभीर कठिनाई बताई।
रिपोर्ट में पारंपरिक कोयला खदानों और तेल रिफाइनरियों से जुड़े श्रमिकों के पुनर्वास और प्रशिक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया। आईईए ने सरकारों से अपील की है कि वे कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में निवेश करें ताकि ऊर्जा बदलाव पूरी तरह से न्यायसंगत और समावेशी बना रहे।




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