भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों ने शुक्रवार को कारोबार के दौरान अभूतपूर्व ऊंचाइयों को छुआ, हालांकि अंतिम घंटे में हल्की मुनाफावसूली के बावजूद बाजार ने लगातार तीसरे सप्ताह शानदार बढ़त दर्ज की। 30 शेयरों वाला बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स इंट्राडे में 85,978.25 के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया—जो 86,000 के मनोवैज्ञानिक आंकड़े से मात्र 22 अंक दूर था—और अंततः 85,571.85 पर बंद हुआ। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का 50 शेयरों वाला निफ्टी 50 सूचकांक 26,277.35 के ऐतिहासिक शिखर को छूने के बाद 26,178.95 पर बंद हुआ।
पांच दिनों के कारोबारी सप्ताह के दौरान दोनों प्रमुख सूचकांकों में लगभग 1.2 प्रतिशत की साप्ताहिक वृद्धि दर्ज की गई, जिससे बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) 476 लाख करोड़ रुपये (5.7 ट्रिलियन डॉलर) के पार पहुंच गया। संस्थागत निवेशकों द्वारा वित्तीय शेयरों से मुनाफा निकालकर फार्मा, ऊर्जा और निर्यात-उन्मुख आईटी कंपनियों में निवेश करने से लार्ज-कैप शेयरों में मजबूती बनी रही।
फार्मा, एनर्जी और आईटी दिग्गजों ने दलाल स्ट्रीट को नई ऊंचाई पर पहुंचाया
शुक्रवार के कारोबार में निफ्टी फार्मा, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी मेटल सूचकांकों ने 1.1 प्रतिशत से 2.5 प्रतिशत तक की छलांग लगाकर बाजार का नेतृत्व किया। सन फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्रीज, सिप्ला, रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसे दिग्गज शेयरों ने सूचकांकों को सबसे अधिक मजबूती प्रदान की, जिससे एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक में हुई मामूली गिरावट की भरपाई हो गई।
चीन द्वारा अपनी औद्योगिक मांग को पुनर्जीवित करने और रियल एस्टेट क्षेत्र को स्थिर करने के लिए घोषित बड़े मौद्रिक और राजकोषीय प्रोत्साहन पैकेज के बाद भारतीय धातु और खनन शेयरों में भी भारी खरीदारी देखी गई। लंदन मेटल एक्सचेंज में धातु कीमतों में तेजी के बीच टाटा स्टील, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और जेएसडब्ल्यू स्टील के शेयरों ने पूरे सप्ताह शानदार प्रदर्शन किया।
“वैश्विक मौद्रिक नरमी, घरेलू म्यूचुअल फंड एसआईपी (SIP) के मजबूत प्रवाह और कॉर्पोरेट आय की स्पष्ट संभावनाओं के समर्थन से भारतीय शेयर बाजार ने लगातार तीन सप्ताह तक उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है।”
विदेशी निवेश और घरेलू एसआईपी प्रवाह से बुल रन को मिला मजबूत आधार
बाजार विश्लेषकों ने भारत की इस ऐतिहासिक तेजी का श्रेय विदेशी और घरेलू नकदी प्रवाह के मजबूत संगम को दिया है। सितंबर की शुरुआत में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 50 आधार अंकों की कटौती के बाद, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने इस महीने भारतीय इक्विटी में 57,000 करोड़ रुपये (6.8 बिलियन डॉलर) से अधिक का निवेश किया है, जो इस कैलेंडर वर्ष की सबसे बड़ी मासिक विदेशी खरीदारी है।
इसके साथ ही, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 23,500 करोड़ रुपये से अधिक के मासिक सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) योगदान के दम पर बाजार को निरंतर सहारा दिया है। अक्टूबर की ओर देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक अब दूसरी तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजों, त्योहारी सीजन की उपभोक्ता मांग और भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर बारीकी से नजर रखेंगे।




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