भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी नवीनतम साप्ताहिक सांख्यिकीय पूरक के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार पहली बार 700 अरब डॉलर के ऐतिहासिक मील के पत्थर को पार कर गया है। एक ही सप्ताह में 12.588 अरब डॉलर की जबरदस्त छलांग लगाते हुए कुल भंडार 704.885 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। इस उपलब्धि के साथ भारत—चीन, जापान और स्विट्जरलैंड के बाद—700 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार रखने वाला विश्व का चौथा देश बन गया है।
केंद्रीय बैंक के विस्तृत आंकड़ों के मुताबिक कुल भंडार के सबसे बड़े घटक विदेशी मुद्रा आस्तियों (FCA) में समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान 10.468 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 616.154 अरब डॉलर हो गया। डॉलर के रूप में व्यक्त की जाने वाली विदेशी मुद्रा आस्तियों में यूरो, ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं के मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी शामिल होता है।
स्वर्ण भंडार और विदेशी बॉन्ड निवेश से मिली ऐतिहासिक मजबूती
विदेशी मुद्रा आस्तियों के साथ-साथ आरबीआई के स्वर्ण भंडार के मूल्य में भी इस सप्ताह 2.184 अरब डॉलर की उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई, जिससे यह 65.796 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास विशेष आहरण अधिकार (SDR) 80 लाख डॉलर बढ़कर 18.547 अरब डॉलर हो गए, जबकि आईएमएफ में भारत की आरक्षित स्थिति 4.387 अरब डॉलर रही।
अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक उभरते बाजारों के बॉन्ड सूचकांकों में भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों के शामिल होने के बाद से विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) का प्रवाह लगातार मजबूत रहा है। इस कैलेंडर वर्ष की शुरुआत से अब तक विदेशी मुद्रा भंडार में 68 अरब डॉलर से अधिक की वृद्धि हुई है, जो भारत को लगभग 11.8 महीने के वस्तु आयात कवर के बराबर बाह्य सुरक्षा प्रदान करती है।
“700 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार के मील के पत्थर को पार करना भारत के बाह्य क्षेत्र को वैश्विक वृहद आर्थिक अस्थिरता और मुद्रा झटकों के विरुद्ध अभूतपूर्व सुरक्षा कवच प्रदान करता है।”
रुपये की स्थिरता और संप्रभु साख को बढ़ावा
रिजर्व बैंक की अनुशासित मुद्रा प्रबंधन नीति ने पिछले दो वर्षों में भारतीय रुपये को उभरते बाजारों की सबसे स्थिर मुद्राओं में बनाए रखने में मदद की है। विदेशी निवेश के तेज प्रवाह के दौरान अतिरिक्त डॉलर की खरीद कर आरबीआई ने न केवल निर्यात प्रतिस्पर्धा को सुरक्षित रखा है, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव या कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए एक मजबूत बफर भी तैयार किया है।
वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और मुंबई के वित्तीय विश्लेषकों ने रेखांकित किया कि 700 अरब डॉलर के स्तर को पार करना आगामी सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग समीक्षाओं से पहले भारत की वृहद आर्थिक विश्वसनीयता को और सुदृढ़ करता है। सूचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा निर्यात में तेजी, प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजे जाने वाले धन (रेमिटेंस) और नियंत्रित चालू खाता घाटे के बल पर भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है।




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