फॉक्सवैगन पैसेंजर कार ब्रांड के मुख्य कार्यकारी थॉमस शेफर ने मंगलवार को कर्मचारियों को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कंपनी को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहना है, तो जर्मनी में विनिर्माण संयंत्रों को बंद करना, नौकरियों में कटौती और वेतन समायोजन अपरिहार्य है। शेफर का यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रबंधन और ट्रेड यूनियन आईजी मेटल के बीच हनोवर में उच्च स्तरीय वार्ता शुरू हुई है।
कंपनी की गंभीर स्थिति को रेखांकित करते हुए शेफर ने बताया कि फॉक्सवैगन के जर्मन संयंत्र कोविड-19 महामारी से पहले के स्तर की तुलना में प्रति वर्ष लगभग 5 लाख कम कारों का निर्माण कर रहे हैं। मांग में यह संरचनात्मक कमी वास्तव में दो बड़े वाहन असेंबली संयंत्रों के कुल वार्षिक उत्पादन के बराबर है।
उत्पादन में भारी गिरावट और चीनी ईवी कंपनियों का दबाव
कंपनी की वित्तीय चुनौतियों का मुख्य कारण यूरोप में इलेक्ट्रिक वाहनों की सुस्त बिक्री, जर्मनी में अत्यधिक ऊर्जा लागत और बीवाईडी जैसी चीनी ईवी कंपनियों का आक्रामक विस्तार है। चालू वर्ष की पहली छमाही में फॉक्सवैगन का परिचालन लाभ मार्जिन गिरकर मात्र 2.3% रह गया, जो प्रबंधन के 6.5% के लक्ष्य से बहुत पीछे है।
कंपनी के शीर्ष प्रबंधन ने तीन दशक पुराने नौकरी सुरक्षा समझौते को हाल ही में रद्द कर दिया था, जिसके तहत 2029 तक कर्मचारियों की अनिवार्य छंटनी पर रोक लगी थी। ओस्नाब्रुक और ड्रेसडेन जैसे शहरों में स्थित संयंत्रों को अब संभावित रूप से बंद करने या पुनर्गठित करने की सूची में रखा गया है।
“हमारे जर्मन संयंत्रों की लागत स्थिति वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए बिल्कुल अनुकूल नहीं है। हम छोटे-मोटे बदलावों से इससे बाहर नहीं निकल सकते; हमें कड़े संरचनात्मक पुनर्गठन की आवश्यकता है।”
हनोवर में यूनियन के साथ टकराव और राष्ट्रव्यापी हड़ताल का खतरा
कंपनी के रुख से आईजी मेटल यूनियन में भारी आक्रोश है, जो फॉक्सवैगन के छह प्रमुख जर्मन कारखानों में लगभग 1,20,000 कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करती है। यूनियन के मुख्य वार्ताकार थॉर्स्टन ग्रोएगर ने हनोवर में 7% वेतन वृद्धि और नौकरी सुरक्षा गारंटी बहाल करने की मांग की और कहा कि मांगें न मानने पर दिसंबर से हड़ताल की जाएगी।
फॉक्सवैगन में चल रहा यह विवाद समूचे जर्मनी के औद्योगिक भविष्य के लिए एक बड़ा संकेतक है, जहां विनिर्माण क्षेत्र लगातार सुस्ती का सामना कर रहा है। लोअर सैक्सोनी राज्य की कंपनी में 20% वोटिंग हिस्सेदारी होने के कारण इस बातचीत के परिणाम पर पूरे यूरोप के ऑटो क्षेत्र की नजरें टिकी हैं।




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