जापान के अनुभवी रूढ़िवादी नेता और पूर्व रक्षा मंत्री शिगेरू इशिबा ने शुक्रवार को देश की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के अध्यक्ष पद का चुनाव जीत लिया। बेहद कड़े मुकाबले में उन्होंने आर्थिक सुरक्षा मंत्री सनाए ताकाइची को दूसरे चरण के मतदान में पराजित किया। पार्टी नेतृत्व के लिए यह उनका पांचवां प्रयास था, और इस जीत के साथ ही अगले सप्ताह संसद द्वारा उन्हें जापान का 102वां प्रधानमंत्री चुना जाना तय हो गया है।
यह चुनाव मौजूदा प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के पद छोड़ने के फैसले के बाद कराया गया था। पार्टी में वित्तीय चंदे से जुड़े घोटालों के कारण जनता में भारी रोष था और किशिदा सरकार की लोकप्रियता ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गई थी। पहले दौर में कुल नौ उम्मीदवारों ने भाग्य आजमाया, जो पार्टी के पारंपरिक गुटों के विघटन के बाद आंतरिक प्रतिस्पर्धा की गहराई को दर्शाता है।
पांचवें प्रयास में मिली ऐतिहासिक जीत, ताकाइची को दी शिकस्त
निर्णायक दूसरे दौर में इशिबा को 215 वोट मिले, जिनमें 189 सांसदों के और 26 प्रांतीय शाखाओं के मत शामिल थे। वहीं उनकी प्रतिद्वंद्वी सनाए ताकाइची को 194 वोट हासिल हुए। ताकाइची पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की कट्टर समर्थक मानी जाती हैं और पहले दौर में शीर्ष पर थीं, लेकिन मध्यममार्गी सांसदों ने दूसरे दौर में एकजुट होकर इशिबा के पक्ष में मतदान किया।
रक्षा मामलों, सैन्य खरीद और कृषि नीतियों के विशेषज्ञ माने जाने वाले 67 वर्षीय इशिबा पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच खासे लोकप्रिय रहे हैं, हालांकि पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ उनके मतभेद भी जगजाहिर रहे हैं। उन्होंने अपने अभियान में पार्टी के पुराने ढर्रे को चुनौती देते हुए पूर्ण वित्तीय पारदर्शिता लागू करने की वकालत की।
“मैं जापान को एक ऐसा सुरक्षित और खुशहाल देश बनाने के लिए अपनी पूरी शक्ति लगा दूंगा जहां हर नागरिक फिर से मुस्कुरा सके, और राजनीति में जनता का विश्वास बहाल हो सके।”
ग्रामीण पुनरुद्धार और क्षेत्रीय रक्षा सुरक्षा पर रहेगा जोर
घरेलू आर्थिक मोर्चे पर इशिबा ने टोक्यो पर अत्यधिक निर्भरता कम करने और उपेक्षित ग्रामीण क्षेत्रों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर बल दिया है। उन्होंने क्षेत्रीय अवसंरचना, आधुनिक कृषि और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने की योजना पेश की है। इसके अतिरिक्त, वे श्रमिकों के वेतन में निरंतर वृद्धि और मुद्रास्फीति से निपटने के लिए आवश्यक कदमों के पक्षधर हैं।
विदेश और सुरक्षा नीति के मामले में इशिबा के पास दशकों का अनुभव है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच वे एशिया में एक बहुपक्षीय सुरक्षा तंत्र और अमेरिका के साथ अधिक संतुलित रक्षा समझौते की वकालत करते रहे हैं। पद संभालने के बाद उनकी पहली बड़ी चुनौती जल्द आम चुनाव कराकर जापानी मतदाताओं से सीधा जनादेश हासिल करने की होगी।




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