भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शुक्रवार को इक्विटी इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए छह-सूत्रीय नियामक सुधारों की घोषणा की, जिसका उद्देश्य खुदरा निवेशकों को बढ़ते सट्टेबाजी नुकसान से बचाना है। नए नियमों के तहत इंडेक्स फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग के लिए न्यूनतम अनुबंध आकार को मौजूदा 5 लाख रुपये से तीन गुना बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दिया गया है।

अनुबंध का आकार बढ़ाने के साथ ही सेबी ने यह भी निर्देश दिया कि प्रत्येक स्टॉक एक्सचेंज को अब केवल एक बेंचमार्क इंडेक्स पर ही साप्ताहिक एक्सपायरी की पेशकश करने की अनुमति होगी। अब तक निफ्टी, बैंक निफ्टी और सेंसेक्स के कारण सप्ताह के लगभग हर दिन एक्सपायरी होती थी, जिससे बाजार में सट्टेबाजी का माहौल बन गया था।

खुदरा सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए सेबी ने उठाए छह कड़े कदम

नए नियमों के तहत ब्रोकरेज कंपनियों को विकल्प खरीदारों से अग्रिम प्रीमियम वसूलना अनिवार्य होगा, जिससे उधारी पर किए जाने वाले जोखिम भरे सौदों पर रोक लगेगी। इसके अलावा निपटान के दिन अत्यधिक उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए सेबी ने दो प्रतिशत अतिरिक्त एक्सट्रीम लॉस मार्जिन अनिवार्य किया है।

सेबी ने यह कड़ा कदम अपने उस विस्तृत अध्ययन के बाद उठाया है, जिसमें खुलासा हुआ था कि वित्त वर्ष 2022 से 2024 के दौरान 93 प्रतिशत खुदरा कारोबारियों को एफएंडओ में शुद्ध घाटा हुआ। तीन वर्षों में खुदरा निवेशकों को कुल 1.8 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ, जिसमें युवा कारोबारियों की संख्या सबसे अधिक थी।

“These calibrated regulatory interventions are essential to protect retail participants from excessive speculative exposure and ensure long-term stability across India's financial markets.”

खुदरा कारोबारियों को हुए 1.8 लाख करोड़ के नुकसान के बाद चेता नियामक

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बीएसई नवंबर 2024 से इन नए नियमों को चरणबद्ध तरीके से लागू करेंगे, और अप्रैल 2025 तक यह ढांचा पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा। हालांकि इससे ब्रोकरेज और एक्सचेंजों के वॉल्यूम में 20 से 30 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों ने इसे दीर्घकालिक स्थिरता के लिए जरूरी बताया है।

भारतीय रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय ने भी इस बात पर चिंता जताई थी कि पारिवारिक बचत का बड़ा हिस्सा सट्टेबाजी में बर्बाद हो रहा है। सेबी का मानना है कि इन कड़े कदमों से खुदरा निवेशकों का धन सुरक्षित होगा और वे म्यूचुअल फंड तथा इक्विटी जैसे सुरक्षित और उत्पादक माध्यमों में दीर्घकालिक निवेश करेंगे।

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