दुनिया की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनी सऊदी अरामको ने शुक्रवार को अपनी 100 अरब डॉलर की गैर-पारंपरिक गैस विस्तार रणनीति में एक बड़ा कदम आगे बढ़ाया। कंपनी ने विशाल जाफुराह गैस क्षेत्र के दूसरे चरण के लिए प्रमुख इंजीनियरिंग और निर्माण (ईपीसी) अनुबंधों को अंतिम रूप दिया और साथ ही यूरोप व पूर्वी एशिया के ऊर्जा समूहों के साथ तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति के समझौते किए।

सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत में स्थित जाफुराह बेसिन मध्य पूर्व का सबसे बड़ा शेल गैस भंडार है, जिसमें अनुमानित 229 ट्रिलियन क्यूबिक फीट कच्ची गैस और 75 अरब बैरल कंडेनसेट मौजूद है। नए अरबों डॉलर के अनुबंधों के तहत गैस संपीड़न सुविधाएं, पाइपलाइन नेटवर्क और रियास नेचुरल गैस लिक्विड्स प्लांट का विस्तार किया जाएगा।

जाफुराह गैस बेसिन से 2030 तक उत्पादन में 60% उछाल का लक्ष्य

इन निवेशों के साथ अरामको ने अपने गैस उत्पादन लक्ष्य को संशोधित करते हुए 2021 के स्तर की तुलना में 2030 तक गैस उत्पादन क्षमता में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि का लक्ष्य तय किया है। जाफुराह से प्रतिदिन दो अरब क्यूबिक फीट गैस के अलावा पेट्रोकेमिकल उद्योग के लिए प्रचुर मात्रा में ईथेन भी प्राप्त होगी।

घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अरामको ने अंतर्राष्ट्रीय एलएनजी व्यापार में भी अपनी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाई है। मिडओशन एनर्जी और अमेरिकी एलएनजी टर्मिनलों में हालिया निवेश के बाद कंपनी ने जापान, दक्षिण कोरिया और जर्मनी के पावर ग्रिड को स्वच्छ ईंधन की आपूर्ति के लिए दीर्घकालिक समझौते किए हैं।

“Our expansion in unconventional gas and global LNG supply is pivotal to meeting rising worldwide power demand while supporting lower-carbon energy transitions across our global client base.”

अंतर्राष्ट्रीय एलएनजी संयुक्त उपक्रमों से वैश्विक बाजार में अरामको की मजबूत पकड़

सऊदी अरब के भीतर प्राकृतिक गैस की उपलब्धता बढ़ना ऊर्जा मंत्रालय के 'लिक्विड डिस्प्लेसमेंट प्रोग्राम' की रीढ़ है। बिजली उत्पादन और जल विलवणीकरण संयंत्रों में कच्चे तेल के बजाय गैस और सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से सऊदी अरब प्रतिदिन लगभग 10 लाख बैरल कच्चा तेल निर्यात के लिए बचा सकेगा।

ऊर्जा विश्लेषकों का कहना है कि गैस और एलएनजी की ओर अरामको का यह झुकाव भविष्य में परिवहन ईंधन की मांग में होने वाले बदलावों से पहले कंपनी के राजस्व स्रोतों में विविधता लाएगा। इसके अलावा यह गैस जुबैल और नियोम में बन रहे विशाल ब्लू हाइड्रोजन और अमोनिया संयंत्रों को भी ईंधन प्रदान करेगी।

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