कतर की राष्ट्रीय ऊर्जा कंपनी कतरएनर्जी ने 22 सितंबर 2026 को प्रमुख यूरोपीय ऊर्जा कंपनियों के एक संघ के साथ 27 साल के ऐतिहासिक बिक्री और खरीद समझौतों (एसपीए) पर हस्ताक्षर करने की घोषणा की। यह दीर्घकालिक अनुबंध उत्तर-पश्चिमी यूरोप के आयात टर्मिनलों तक सालाना 35 लाख टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति की गारंटी देता है, जो 2053 तक जारी रहेगी।

यह समझौता 2022 में रूसी पाइपलाइन गैस पर निर्भरता समाप्त करने के बाद यूरोपीय खरीदारों द्वारा किए गए सबसे लंबे आपूर्ति समझौतों में से एक है। वाणिज्यिक शर्तों के तहत गैस की डिलीवरी 2026 के अंत से शुरू होगी, जब नॉर्थ फील्ड विस्तार की शुरुआती उत्पादन इकाइयां चालू हो जाएंगी।

यूरोप की बदलती ऊर्जा संरचना और ऊर्जा सुरक्षा की बहाली

आपूर्ति की जाने वाली एलएनजी का उत्पादन रास लफान स्थित नॉर्थ फील्ड ईस्ट (एनएफई) और नॉर्थ फील्ड साउथ (एनएफएस) से किया जाएगा। इस परियोजना में 30 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया जा रहा है, जिसमें कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज (सीसीएस) तकनीक भी शामिल है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में 25% की कमी आएगी।

सौदा करने वाली यूरोपीय कंपनियों ने कहा कि यह दीर्घकालिक समझौता स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ते बदलाव के दौरान मूल्य स्थिरता और आपूर्ति की निश्चितता प्रदान करता है। हालांकि यूरोपीय नीति निर्माता जीवाश्म ईंधन से दूरी बनाना चाहते हैं, लेकिन सौर और पवन ऊर्जा के उतार-चढ़ाव को संतुलित करने के लिए गैस को अनिवार्य माना गया है।

“ये समझौते यूरोपीय बाजार के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं और दुनिया के सबसे विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी ऊर्जा आपूर्तिकर्ता के रूप में हमारी भूमिका को रेखांकित करते हैं।”

नॉर्थ फील्ड मेगाप्रोजेक्ट और वैश्विक एलएनजी बाजार में कतर का दबदबा

कतरएनर्जी समानांतर रूप से नॉर्थ फील्ड वेस्ट विस्तार परियोजना पर भी काम कर रही है, जिससे दशक के अंत तक देश की कुल एलएनजी उत्पादन क्षमता 77 मिलियन टन से बढ़कर 142 मिलियन टन प्रति वर्ष हो जाएगी—जो 85% की भारी वृद्धि है। इसके लिए दक्षिण कोरिया और चीन से 100 से अधिक नए एलएनजी जहाजों का बेड़ा तैयार कराया जा रहा है।

ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि यूरोपीय कंपनियों के साथ इस दीर्घकालिक अनुबंध से कतर को एशियाई बाजारों के साथ-साथ यूरोप में भी स्थिर खरीदार मिल गए हैं। उत्पादन की बेहद कम लागत के दम पर कतर आने वाले तीन दशकों तक वैश्विक ऊर्जा बाजार का निर्विवाद अगुआ बना रहेगा।

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