बैंक ऑफ कोरिया (BOK) ने 23 सितंबर, 2026 को आधिकारिक रिपोर्ट जारी कर बताया कि देश का उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) अगस्त में पिछले महीने की तुलना में 0.1% गिर गया। थोक मूल्यों में यह गिरावट अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के कारण आई है, जिससे केंद्रीय बैंक के लिए आगामी मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों में कटौती करने का स्पष्ट आधार तैयार हो गया है।
केंद्रीय बैंक के आर्थिक सांख्यिकी विभाग के अनुसार, अगस्त का पीपीआई 119.41 पर रहा। वार्षिक आधार पर उत्पादक मूल्य वृद्धि घटकर 1.6% रह गई, जो जुलाई में 2.6% थी। थोक कीमतों में इस गिरावट का मुख्य कारण पेट्रोलियम और कोयला उत्पादों में 4.0% की तीव्र गिरावट और बुनियादी रासायनिक वस्तुओं में 0.6% की कमी रही।
कच्चे तेल और औद्योगिक वस्तुओं में गिरावट से थोक महंगाई पर लगाम
हालांकि, अत्यधिक गर्मी के कारण कृषि और पशुधन उत्पादों की कीमतें 5.3% बढ़ीं, लेकिन विनिर्मित औद्योगिक उत्पादों की कीमतों में कुल मिलाकर 0.4% की गिरावट आई और सेवा क्षेत्र के उत्पादक शुल्क स्थिर रहे। इससे संकेत मिलता है कि कोरियाई विनिर्माण क्षेत्र में लागत का दबाव तेजी से कम हो रहा है।
थोक महंगाई में यह कमी उपभोक्ता कीमतों में आई नरमी के अनुरूप है। अगस्त में दक्षिण कोरिया की उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति (सीपीआई) घटकर 2.0% पर आ गई, जिससे पिछले साढ़े तीन वर्षों में पहली बार केंद्रीय बैंक का आधिकारिक लक्ष्य हासिल हुआ है। मुद्रास्फीति कम होने से वास्तविक ब्याज दरें बढ़ गई हैं, जिससे घरेलू खपत पर दबाव बढ़ रहा है।
“अगस्त में उत्पादक मूल्य सूचकांक में गिरावट दर्शाती है कि विनिर्माण क्षेत्र में मुद्रास्फीति पर काबू पा लिया गया है। ऊर्जा कीमतों के स्थिर होने से ब्याज दरों को सामान्य करने की परिस्थितियां अनुकूल हो रही हैं।”
घरेलू कर्ज नियंत्रण और आर्थिक प्रोत्साहन के बीच संतुलन
अब वित्तीय बाजारों की निगाहें गवर्नर री चांग-योंग और मौद्रिक नीति बोर्ड की 11 अक्टूबर की बैठक पर टिकी हैं, जहां 3.50% की मौजूदा नीतिगत दर की समीक्षा की जाएगी। हालांकि सियोल में रियल एस्टेट और बंधक ऋणों की वृद्धि के कारण बैंक अब तक दरें घटाने से बचता रहा है, लेकिन हालिया सख्त ऋण नियमों के लागू होने के बाद सितंबर में घरेलू ऋण वृद्धि की गति धीमी पड़ी है।
पीपीआई आंकड़े जारी होने के बाद सियोल बॉन्ड बाजार में 3-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड घटकर 2.82% पर आ गई। प्रमुख वित्तीय संस्थानों का मानना है कि छोटे व्यवसायों और खुदरा क्षेत्र को राहत देने के लिए अक्टूबर में ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती कर इसे 3.25% किया जा सकता है।




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