इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने बुधवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर आयोजित अंतरराष्ट्रीय मंच पर जकार्ता की ऐतिहासिक 'बेबास डान एक्टिव' (स्वतंत्र और सक्रिय) विदेश नीति के प्रति अपनी सरकार की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई।

विदेशी राजनयिकों और उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए प्रबोवो ने स्पष्ट किया कि दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और दुनिया की चौथी सबसे अधिक आबादी वाला देश अमेरिका और चीन के बीच किसी भी गुटबाजी का हिस्सा बनने से पूरी तरह इनकार करता है।

अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा के बीच स्वतंत्र और सक्रिय कूटनीति

प्रबोवो ने इंडोनेशिया की प्रसिद्ध कूटनीतिक कहावत को दोहराया कि 'एक हजार दोस्त भी कम हैं और एक अकेला दुश्मन भी बहुत भारी पड़ता है।' उन्होंने कहा कि जकार्ता पश्चिमी लोकतांत्रिक देशों और ब्रिक्स (BRICS) समूह दोनों के साथ आर्थिक साझेदारी को एक साथ आगे बढ़ाएगा।

घरेलू प्राथमिकताओं पर बात करते हुए उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के घरेलू प्रसंस्करण (हिलिरिसासी) का बचाव किया और कहा कि विकासशील देशों को कच्चा माल निर्यात करने के बजाय देश में ही निकल और बॉक्साइट जैसे खनिजों का मूल्यवर्धन करने का संप्रभु अधिकार है।

“इंडोनेशिया का पारंपरिक रुख स्पष्ट है: एक हजार दोस्त भी कम हैं और एक दुश्मन भी बहुत ज्यादा है। हम सभी शक्तियों का सम्मान करते हैं, लेकिन गुटनिरपेक्षता के रास्ते पर अडिग रहेंगे।”

ग्लोबल साउथ की एकजुटता, खाद्य सुरक्षा और फिलिस्तीन का समर्थन

क्षेत्रीय सुरक्षा के संदर्भ में, प्रबोवो ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आसियान (ASEAN) की केंद्रीय भूमिका को स्थिरता का मुख्य आधार बताया। उन्होंने दक्षिण चीन सागर में किसी भी सैन्य गठबंधन का विरोध करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत शांतिपूर्ण बातचीत का समर्थन किया।

वैश्विक मानवीय मुद्दों पर प्रबोवो ने फिलिस्तीन के एक स्वतंत्र राष्ट्र बनने के अधिकार के प्रति इंडोनेशिया के ऐतिहासिक समर्थन को दोहराया और संयुक्त राष्ट्र राहत एजेंसियों को चिकित्सा और आर्थिक सहायता बढ़ाने का वादा किया।

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