आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) ने अपनी नवीनतम अंतरिम रिपोर्ट 'टर्निंग द कॉर्नर' में अनुमान व्यक्त किया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था चार दशकों के सबसे गंभीर मुद्रास्फीति झटके से सफलतापूर्वक उबर रही है। संगठन के अनुसार 2024 और 2025 दोनों वर्षों में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 3.2 प्रतिशत पर स्थिर रहने की संभावना है। पेरिस मुख्यालय में जारी रिपोर्ट में बताया गया कि केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की वजह से मंदी आए बिना महंगाई पर नियंत्रण पाया गया है।

मुद्रास्फीति में नरमी, ऊर्जा लागत में गिरावट और प्रमुख पश्चिमी केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती की शुरुआत ने आम परिवारों को बड़ी राहत दी है। अधिकांश जी20 देशों में वास्तविक मजदूरी में वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे बीते तीन वर्षों से जीवनयापन की ऊंची लागत से जूझ रहे उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति और धारणा में सुधार हुआ है।

घटती महंगाई और मौद्रिक ढील से घरेलू आय व निजी खर्च में सुधार

हालांकि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का प्रदर्शन अभी भी असमान बना हुआ है। अमेरिका की आर्थिक गति असाधारण रूप से मजबूत बनी हुई है, जहां 2024 में 2.6 प्रतिशत और 2025 में 1.6 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है। इसके विपरीत यूरोज़ोन की रिकवरी बेहद सुस्त है, जहां जर्मनी में विनिर्माण क्षेत्र की कमजोरी के कारण चालू वर्ष में केवल 0.7 प्रतिशत और अगले वर्ष 1.3 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना है।

एशियाई क्षेत्र में चीन की जीडीपी वृद्धि 2024 के 4.9 प्रतिशत से घटकर 2025 में 4.5 प्रतिशत पर आने का अनुमान है, क्योंकि वहां रियल एस्टेट का संकट और कमजोर घरेलू मांग विनिर्माण निर्यात की ताकत को सीमित कर रही है। वहीं भारत 2024 में 6.7 प्रतिशत और 2025 में 6.8 प्रतिशत की मजबूत दर के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

“वैश्विक अर्थव्यवस्था सुधार के मोड़ पर है क्योंकि घटती मुद्रास्फीति और आसान होती मौद्रिक नीतियां प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में वास्तविक घरेलू आय और निजी खर्च को बढ़ावा दे रही हैं।”

राजकोषीय अनुशासन और भू-राजनीतिक जोखिमों को लेकर सख्त चेतावनी

सुधार के इन संकेतों के बावजूद ओईसीडी ने आगाह किया कि कई गंभीर जोखिम इस गति को बाधित कर सकते हैं। इनमें सबसे प्रमुख सार्वजनिक कर्ज का अत्यधिक ऊंचा स्तर है, जिससे सरकारों के पास नए संकटों से निपटने के लिए राजकोषीय गुंजाइश सीमित हो गई है। इसके साथ ही पश्चिम एशिया और यूक्रेन में भू-राजनीतिक तनाव समुद्री व्यापार और कच्चे तेल की कीमतों को अस्थिर कर सकते हैं।

ओईसीडी ने केंद्रीय बैंकों से मौद्रिक नीतियों में ढील देते समय आंकड़ों पर आधारित सतर्क रुख अपनाने की सिफारिश की है। साथ ही वित्त मंत्रालयों को मध्यम अवधि के ऋण समेकन की विश्वसनीय योजनाएं लागू करने का आह्वान किया गया है, ताकि उत्पादकता बढ़ाने वाले सुधारों को प्राथमिकता दी जा सके।

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