मैक्सिको की सीनेट ने मंगलवार को देश के 1,30,000 जवानों वाले नेशनल गार्ड के प्रशासनिक, वित्तीय और परिचालन नियंत्रण को औपचारिक रूप से राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय (SEDENA) को सौंपने वाले एक व्यापक संवैधानिक सुधार को मंजूरी दे दी। इस मतदान ने मैक्सिको की नागरिक पुलिस व्यवस्था को स्थायी रूप से सशस्त्र बलों के प्रत्यक्ष नियंत्रण में ला दिया है।

सत्तारूढ़ मोरेना पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने घंटों चली तीखी बहस के बाद आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करते हुए विधेयक को 86 के मुकाबले 42 मतों से पारित कराया। यह संशोधन अब राज्य विधानसभाओं के पास जाएगा, जहां मोरेना के पास आवश्यक 17 से अधिक राज्यों में स्पष्ट बहुमत है।

कानून प्रवर्तन के पुनर्गठन की दिशा में ऐतिहासिक विधायी कदम

निवर्तमान राष्ट्रपति आंद्रेस मैनुअल लोपेज ओब्रेडोर (AMLO) और नवनिर्वाचित राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम द्वारा समर्थित इस कानून का उद्देश्य नेशनल गार्ड को ड्रग कार्टेलों के प्रभाव और भ्रष्टाचार से बचाना है। सरकारी प्रवक्ताओं ने तर्क दिया कि पूर्ववर्ती संघीय पुलिस तंत्र ड्रग तस्करों से मिल गया था, जैसा कि न्यूयॉर्क में पूर्व सुरक्षा मंत्री गेनारो गार्सिया लूना की दोषसिद्धि से साबित हुआ।

नए संवैधानिक ढांचे के तहत, नेशनल गार्ड के सैन्य कर्मियों को सैन्य दर्जा, लाभ और सैन्य अदालतों के तहत कानूनी सुरक्षा प्राप्त होगी। इसके अलावा, गार्ड को सरकारी अभियोजक के निर्देश पर आपराधिक जांच करने का भी अधिकार दिया गया है।

“यह सुधार सुनिश्चित करता है कि नेशनल गार्ड कभी भ्रष्ट नहीं होगा, और हमारे देश को जनता की रक्षा के लिए एक अनुशासित, ईमानदार और स्थायी संस्था मिलेगी।”

सैन्यीकरण पर मानवाधिकार समूहों की चिंताएं और राजनीतिक बहस

विपक्षी दलों के सांसदों ने इस कानून की कड़ी निंदा करते हुए इसे नागरिक व्यवस्था का पूर्ण सैन्यीकरण करार दिया। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे संगठनों ने चेतावनी दी कि सैनिकों के पास नागरिक पुलिस व्यवस्था के अनुकूल मानवाधिकार प्रशिक्षण का अभाव होता है।

इस सुधार के साथ नवनिर्वाचित राष्ट्रपति शिनबाम को संगठित अपराध और सिनालोआ तथा चियापास जैसे राज्यों में चल रहे हिंसक कार्टेल संघर्षों से निपटने के लिए सेना के अधीन एक विशाल आंतरिक बल मिल गया है।

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