नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) का उपयोग कर रहे अंतरराष्ट्रीय खगोलविदों के एक दल ने 23 सितंबर, 2026 को नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित शोध में RUBIES-EGS-QG-1 नामक आकाशगंगा की पुष्टि की घोषणा की। यह प्रारंभिक ब्रह्मांड में अब तक खोजी गई सबसे विशाल शांत या 'मृत' (जिसमें नए तारे नहीं बन रहे हैं) आकाशगंगाओं में से एक है। रेडशिफ्ट z = 4.9 पर स्थित यह आकाशगंगा बिग बैंग के महज 1.1 अरब वर्ष बाद के समय की है।

वेब के नियर-इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोग्राफ (NIRSpec) से एकत्र आंकड़ों से पता चला कि इस आकाशगंगा का तारकीय द्रव्यमान हमारे सूर्य से 100 अरब गुना अधिक है। यह भारी द्रव्यमान लगभग 3,200 प्रकाश वर्ष के त्रिज्या वाले अत्यंत छोटे क्षेत्र में संकुचित है, जो हमारी मिल्की वे आकाशगंगा के आकार का मुश्किल से पांचवां हिस्सा है। इसका तारकीय घनत्व आधुनिक ब्रह्मांड की किसी भी आकाशगंगा से सैकड़ों गुना अधिक है।

एनआईआरस्पेक्ट स्पेक्ट्रोस्कोपी ने अत्यधिक रेडशिफ्ट और शांत कोर की पुष्टि की

स्पेक्ट्रोस्कोपिक विश्लेषण से पता चला कि अवलोकन के समय से सैकड़ों लाखों वर्ष पहले ही इस आकाशगंगा में तारों का निर्माण पूरी तरह बंद हो चुका था। इसमें पुराने और विकसित तारों की उपस्थिति के स्पष्ट संकेत मिले हैं, जो यह दर्शाते हैं कि जब ब्रह्मांड केवल 60 से 80 करोड़ वर्ष पुराना था, तब तारों का निर्माण बेहद तीव्र गति से हुआ और फिर अचानक थम गया।

इस खोज ने मानक लैम्ब्डा-कोल्ड डार्क मैटर (LCDM) ब्रह्मांडीय मॉडल को गहरा झटका दिया है। मौजूदा सिद्धांतों के अनुसार, ब्रह्मांड के इस प्रारंभिक दौर में डार्क मैटर के पास इतनी तेजी से इतने विशाल तारकीय समूह को इकट्ठा करने का गुरुत्वाकर्षण बल नहीं होना चाहिए था।

“ब्रह्मांडीय समय के इतने शुरुआती दौर में इतनी विशाल और पूरी तरह शांत आकाशगंगा का मिलना किंडरगार्टन में किसी सेवानिवृत्त बुजुर्ग से मिलने जैसा है। यह हमें यह पुनर्विचार करने पर मजबूर करता है कि गैस इतनी तेजी से तारों में कैसे बदली और सुपरमैसिव ब्लैक होल ने इस प्रक्रिया को कैसे रोक दिया।”

ब्रह्मांडीय पहेली: आखिर ब्रह्मांड के शुरुआती दौर में तारों का निर्माण कैसे रुका?

वैज्ञानिकों का मानना है कि तारों का निर्माण अचानक रुकने के पीछे सुपरमैसिव ब्लैक होल की सक्रियता हो सकती है। आकाशगंगा के केंद्र में स्थित विशाल ब्लैक होल से निकलने वाली अत्यधिक ऊर्जा और विकिरण ने तारों के निर्माण के लिए आवश्यक ठंडी आणविक गैस को अंतरिक्ष में बाहर फेंक दिया होगा।

RUBIES-EGS-QG-1 की पुष्टि ने जेम्स वेब टेलीस्कोप की अभूतपूर्व इन्फ्रारेड क्षमताओं को एक बार फिर साबित किया है। खगोलविदों को उम्मीद है कि आने वाले समय में ऐसे और प्राचीन खगोलीय पिंडों की खोज होगी, जिससे ब्रह्मांड की उत्पत्ति और आकाशगंगाओं के निर्माण के बुनियादी सिद्धांतों को नए सिरे से लिखा जा सकेगा।

Sources