इजरायली वायुसेना ने शुक्रवार शाम दक्षिणी बेरूत के घनी आबादी वाले दहिएह उपनगर में हिजबुल्लाह के भूमिगत केंद्रीय सैन्य मुख्यालय पर अभूतपूर्व भीषण हवाई हमले किए। तेज धमाकों की आवाज से पूरी लेबनानी राजधानी दहल उठी। आसमान में हजारों फीट ऊंचा काला और नारंगी धुआं छा गया और हमले के प्रभाव से कई बहुमंजिला रिहायशी इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढहकर मलबे में तब्दील हो गईं।
सैन्य विशेषज्ञों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इजरायली लड़ाकू विमानों ने नागरिक इमारतों के नीचे बने गहरे बंकरों को नष्ट करने के लिए विशेष बंकर-बस्टर मिसाइलों और भारी विस्फोटकों का इस्तेमाल किया। हरेत हरेक इलाके में इन विस्फोटों से विशालकाय गड्ढे बन गए और सड़कों पर खड़ी सैकड़ों गाड़ियां मलबे के नीचे दब गईं।
भूमिगत बंकरों पर शक्तिशाली बमबारी से थर्राई लेबनान की राजधानी
हमले के तुरंत बाद इजरायल रक्षा बलों (आईडीएफ) के मुख्य प्रवक्ता रियर एडमिरल डेनियल हगारी ने टेलीविजन संबोधन में पुष्टि की कि इजरायली सेना ने हिजबुल्लाह के केंद्रीय नेतृत्व वाले कमान मुख्यालय पर सटीक हमला किया है। हगारी ने दावा किया कि संगठन ने नागरिक आबादी की आड़ लेकर रिहायशी इमारतों के ठीक नीचे अपना मुख्य सैन्य ढांचा स्थापित कर रखा था।
धमाकों के बाद बेरूत की गलियों में एंबुलेंसों और दमकल गाड़ियों के सायरन गूंजने लगे। लेबनानी नागरिक सुरक्षा बल और आपदा राहत दलों ने मलबे में दबे जीवित लोगों को निकालने के लिए भारी बुलडोजर, कटर और खोजी कुत्तों के साथ सघन अभियान शुरू कर दिया। गिरी हुई इमारतों के बेसमेंट में फंसे लोगों को बचाने के लिए रात भर प्रयास जारी रहे।
“आईडीएफ ने दहिएह के केंद्र में आवासीय इमारतों के नीचे बने हिजबुल्लाह आतंकवादी संगठन के केंद्रीय मुख्यालय पर सटीक हमला किया है।”
मलबे में राहत एवं बचाव कार्य और क्षेत्रीय युद्ध का मंडराता साया
लेबनान के लोक स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इस भीषण बमबारी में दर्जनों लोगों की जान गई है और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मलबे की सफाई के साथ हताहतों की संख्या में भारी वृद्धि की आशंका जताई गई है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग ले रहे लेबनान के प्रधानमंत्री नजीब मिकाती ने इसे बर्बर हमला बताते हुए अपना दौरा बीच में रद्द कर दिया और तुरंत बेरूत लौटने का निर्णय लिया।
हिजबुल्लाह के शीर्ष सैन्य केंद्र पर हुआ यह हमला पिछले एक वर्ष से जारी सीमा पार झड़पों के बीच सबसे खतरनाक मोड़ साबित हुआ है। इस घटना के बाद पूरे पश्चिम एशिया में बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय युद्ध छिड़ने का खतरा गहरा गया है। वाशिंगटन, यूरोपीय राजधानियों और अरब देशों ने बढ़ते तनाव को रोकने के लिए आपात कूटनीतिक संपर्क तेज कर दिए हैं।




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