इंडोनेशिया के पर्यावरण और वानिकी मंत्रालय ने 23 सितंबर, 2026 को हाई-प्रेशर एसिड लीच (एचपीएएल) और रोटरी किल्न-इलेक्ट्रिक फर्नेस (आरकेईएफ) निकेल स्मेल्टर्स में पर्यावरणीय प्रबंधन के लिए एक नया विनियामक ढांचा जारी किया। मध्य सुलावेसी, दक्षिण-पूर्व सुलावेसी और उत्तरी मालुकु के खनन केंद्रों पर केंद्रित यह नया आदेश कानूनी रूप से बाध्यकारी सीमाएं तय करता है, जिससे देश के खनिज उद्योग पर वैश्विक स्तर पर उठने वाली पर्यावरण चिंताओं का समाधान हो सके।
नए दिशानिर्देशों के तहत, सभी शोधन इकाइयों को गहरे समुद्र में टेलिंग्स निपटान (डीएसटीपी) से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके स्थान पर कंपनियों को बहुस्तरीय जियोमेम्ब्रेन लाइनर, निरंतर लीचेट जल निकासी और भूजल निगरानी प्रणालियों से लैस आधुनिक ड्राई-स्टैकिंग सुविधाओं में स्थानांतरित होना होगा। 2027 की पहली तिमाही तक सुरक्षा मानकों को पूरा न करने वाले स्मेल्टर्स के संचालन लाइसेंस निलंबित कर दिए जाएंगे।
समुद्री टेलिंग्स पर प्रतिबंध और सुरक्षित ड्राई स्टैकिंग की अनिवार्यता
यह सरकारी हस्तक्षेप इंडोनेशिया की औद्योगिक प्राथमिकताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समय पर आया है। हालांकि इंडोनेशिया वैश्विक निकेल उत्पादन के 50% से अधिक हिस्से के लिए जिम्मेदार है, पश्चिमी वाहन निर्माता और बैटरी कंपनियां कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों और जैव विविधता के नुकसान को लेकर चिंता व्यक्त करती रही हैं। नए नियमों के जरिए जकार्ता इंडोनेशियाई निकेल को स्वच्छ ऊर्जा बदलाव का एक जिम्मेदार घटक बनाना चाहता है।
वायु गुणवत्ता और कार्बन तीव्रता मानकों को भी काफी कड़ा किया गया है। मोरोवाली और वेडा बे के औद्योगिक पार्कों को सीधे मंत्रालय के राष्ट्रीय निगरानी तंत्र से जुड़ी निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (सीईएमएस) स्थापित करनी होगी। कंपनियों को सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर की प्रति घंटा निगरानी करनी होगी।
“हमारी खनिज संप्रभुता द्वीपसमूह की पारिस्थितिकी की कीमत पर नहीं आ सकती। ये कड़े मानक सुनिश्चित करते हैं कि इंडोनेशियाई निकेल उच्चतम वैश्विक स्थिरता लक्ष्यों को पूरा करे।”
कैप्टिव पावर का डीकार्बोनाइजेशन और वैश्विक ईवी आपूर्ति श्रृंखला
आदेश में औद्योगिक पार्क डेवलपर्स को छह महीने के भीतर नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने की योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। स्मेल्टर ऑपरेटरों को कोयला आधारित बिजली की जगह सोलर पीवी, फ्लोटिंग सोलर और भू-तापीय ऊर्जा को शामिल करने की समयसीमा देनी होगी। राज्य बिजली कंपनी पीएलएन के स्वच्छ ग्रिड से जुड़ने वाली कंपनियों को कर रियायतें दी जाएंगी।
बाजार विश्लेषकों ने इस विनियामक स्पष्टता का स्वागत किया है। उनका मानना है कि पारदर्शी अनुपालन से इंडोनेशियाई मिक्स्ड हाइड्रॉक्साइड प्रेसिपिटेट (एमएचपी) पर लगने वाले ईएसजी डिस्काउंट को खत्म करने में मदद मिलेगी। 2030 तक बैटरी-ग्रेड निकेल की भारी मांग के बीच, इंडोनेशिया का यह कदम पश्चिमी बाजारों के साथ दीर्घकालिक अनुबंध सुरक्षित करने में मददगार साबित होगा।




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