भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने देश से तपेदिक (टीबी) को समाप्त करने के राष्ट्रीय अभियान को नई गति देते हुए मल्टीड्रग-रेजिस्टेंट टीबी (MDR-TB) के लिए छह महीने की नई ऑल-ओरल BPaLM उपचार पद्धति के राष्ट्रव्यापी विस्तार की शुरुआत की है। राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत लागू इस चार-दवा संयोजन में बेडाक्विलिन, प्रेटोमानिड, लिनेज़ोलिड और मोक्सीफ्लोक्सासिन शामिल हैं, जो पारंपरिक उपचार की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और तेज़ विकल्प है।

अब तक भारत में दवा-प्रतिरोधी टीबी से पीड़ित मरीजों को 18 से 24 महीने तक चलने वाले बेहद कठिन इलाज से गुजरना पड़ता था, जिसमें दर्दनाक इंजेक्शन, गंभीर दुष्प्रभाव और इलाज बीच में छूटने का उच्च जोखिम शामिल था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा प्रमाणित नैदानिक परीक्षणों से पुष्टि हुई है कि 26 सप्ताह का BPaLM कोर्स लगभग 89 प्रतिशत तक ठीक होने की दर (क्योर रेट) प्रदान करता है और दवाओं का बोझ व खर्च दोनों कम करता है।

दो साल के कठिन एमडीआर-टीबी इलाज को घटाकर छह महीने किया गया

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की मंजूरी और NTEP के परिचालन दिशानिर्देशों के तहत अब राज्य स्तरीय टीबी प्रशिक्षण केंद्रों और जिला नोडल अस्पतालों के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 75,000 दवा-प्रतिरोधी टीबी रोगियों को BPaLM पद्धति पर लाया जा रहा है। राज्यों के स्वास्थ्य निदेशालयों ने पल्मोनोलॉजिस्ट, जिला टीबी अधिकारियों और आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यशालाएं शुरू कर दी हैं।

इस चिकित्सा उपलब्धि के साथ-साथ केंद्र सरकार ने 'निक्षय पोषण योजना' (NPY) के तहत पोषण सहायता ढांचे को भी मजबूत किया है। यह देखते हुए कि कुपोषण भारत में टीबी के संक्रमण और पुनर्सक्रियण का सबसे बड़ा जोखिम कारक है, मंत्रालय ने इलाज की पूरी अवधि के दौरान प्रत्येक टीबी रोगी के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) सहायता राशि को 500 रुपये से दोगुना कर 1,000 रुपये प्रति माह कर दिया है।

“उन्नत पोषण सहायता के साथ छह महीने की BPaLM उपचार पद्धति को लागू करने से पूरे भारत में मल्टीड्रग-रेजिस्टेंट तपेदिक रोगियों के ठीक होने की दर में नाटकीय सुधार होगा और इलाज का बोझ कम होगा।”

निक्षय पोषण योजना में दोगुनी सहायता और निक्षय 2.0 से डिजिटल ट्रैकिंग

इसके अतिरिक्त, सरकार ने उन्नत 'निक्षय 2.0' डिजिटल पोर्टल के माध्यम से 'प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान' का विस्तार किया है, जो सामुदायिक दानदाताओं—यानी 'निक्षय मित्रों'—को उच्च प्रोटीन युक्त खाद्य टोकरियों की आवश्यकता वाले मरीजों से जोड़ता है। संशोधित दिशानिर्देशों के तहत संक्रामक टीबी रोगियों के परिवार के सदस्यों को भी निवारक पोषण किट और टीबी निवारक उपचार (TPT) प्रदान किया जाएगा।

जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आणविक जांच (NAAT), दोगुनी डीबीटी पोषण राशि और छह महीने की BPaLM रेजिमेन के समन्वित उपयोग से राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली के करोड़ों रुपये बचेंगे और भारत टीबी मुक्त राष्ट्र बनने के अपने सतत विकास लक्ष्य को तेजी से हासिल कर सकेगा।

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