जर्मनी के कॉर्पोरेट जगत में निराशा का माहौल सितंबर महीने में और गहरा गया, जब इफू इंस्टीट्यूट का प्रमुख बिजनेस क्लाइमेट इंडेक्स लगातार चौथे महीने गिरकर 85.4 अंक पर आ गया, जो अगस्त में 86.6 था। यह आंकड़ा अर्थशास्त्रियों के अनुमानों से काफी नीचे रहा, जो दर्शाता है कि यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है और एक बार फिर तकनीकी मंदी के मुहाने पर खड़ी है।

म्यूनिख स्थित इस शोध संस्थान द्वारा विनिर्माण, सेवा, व्यापार और निर्माण क्षेत्र की लगभग 9,000 कंपनियों के मासिक सर्वेक्षण के आधार पर जारी रिपोर्ट में प्रबंधकों की बढ़ती चिंताएं सामने आईं। मौजूदा कारोबारी हालात का आकलन 86.4 से गिरकर 84.4 पर आ गया, जबकि अगले छह महीनों की उम्मीदों से जुड़ा सूचकांक भी 86.8 से फिसलकर 86.3 पर आ गया, जो लंबे समय तक आर्थिक ठहराव का संकेत देता है।

लगातार चौथी गिरावट और विनिर्माण क्षेत्र का गहराता संकट

सबसे भारी गिरावट जर्मनी के रीढ़ माने जाने वाले औद्योगिक व विनिर्माण क्षेत्र में दर्ज की गई। विनिर्माण विश्वास का स्तर महामारी के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, जहां कंपनियों के ऑर्डर बुक खाली हो रहे हैं और प्रमुख विदेशी बाजारों—विशेषकर चीन और अमेरिका—से निर्यात मांग काफी सुस्त पड़ गई है। उद्योग जगत लगातार महंगी बिजली दरों, अत्यधिक नौकरशाही और कुशल कामगारों की किल्लत की शिकायत कर रहा है।

जर्मन निर्यात की पहचान रहा ऑटोमोबाइल क्षेत्र इस संकट के केंद्र में है। इलेक्ट्रिक वाहनों की कमजोर मांग, चीनी वाहन निर्माताओं से मिल रही कड़ी मूल्य प्रतिस्पर्धा और आपूर्ति श्रृंखला के बढ़ते खर्चों के कारण प्रमुख कार निर्माताओं और उनके कलपुर्जा आपूर्तिकर्ताओं ने लाभ में कटौती की चेतावनियां जारी की हैं और घरेलू उत्पादन घटाने के संकेत दिए हैं।

“जर्मन अर्थव्यवस्था पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। मौजूदा कारोबारी परिस्थितियों और भविष्य की उम्मीदों, दोनों ही मोर्चों पर जर्मन कंपनियों के विश्वास में उल्लेखनीय गिरावट आई है।”

ऑटोमोबाइल क्षेत्र की चुनौतियां, ढांचागत समस्याएं और विकास अनुमान

रिपोर्ट के अनुसार यह सुस्ती अब केवल भारी उद्योगों तक सीमित नहीं है। सेवा क्षेत्र, जिसने वर्ष की शुरुआत में स्थिरता प्रदान की थी, अब बी2बी मांग में कमी के कारण सुस्ती का सामना कर रहा है। वहीं निर्माण क्षेत्र उच्च ब्याज दरों और वाणिज्यिक परियोजनाओं के ठप होने के चलते पहले से ही गहरे संकट के दौर से गुजर रहा है।

प्रमुख आर्थिक शोध संस्थानों ने जर्मनी के लिए अपने वार्षिक विकास अनुमानों को घटाना शुरू कर दिया है, जिसमें पूरे वर्ष के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में मामूली संकुचन की आशंका जताई जा रही है। इफू के इन निराशाजनक आंकड़ों ने चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ की गठबंधन सरकार पर संरचनात्मक सुधारों को तेज करने और कॉर्पोरेट करों में राहत देने का दबाव बढ़ा दिया है।

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