फ्रांस की नेशनल असेंबली की वित्त समिति ने बुधवार को अर्थव्यवस्था और वित्त मंत्रालय (बर्सी) के शीर्ष अधिकारियों को संसद में तलब कर कड़ी पूछताछ की। हालिया रिपोर्टों में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2024 के लिए देश का राजकोषीय घाटा जीडीपी के 5.6% को पार कर सकता है, और सुधारात्मक कदमों के बिना यह 6.0% तक पहुंच सकता है।
वित्त समिति के अध्यक्ष एरिक कोकेरेल द्वारा बुलाई गई इस आपातकालीन सुनवाई में सांसदों ने सवाल उठाया कि सरकार का 5.1% घाटे का पूर्व अनुमान इतनी जल्दी कैसे विफल हो गया। विपक्षी दलों ने आंतरिक ट्रेजरी दस्तावेजों की मांग की, जिनमें टैक्स राजस्व में भारी कमी और स्थानीय खर्चों में वृद्धि का ब्योरा है।
सार्वजनिक खातों की बिगड़ती स्थिति पर बर्सी पर बरसे सांसद
नवनियुक्त वित्त मंत्री एंटोनी आर्मंड ने स्थिति की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा कि फ्रांस का 3.1 ट्रिलियन यूरो (जीडीपी का 111%) से अधिक का सार्वजनिक ऋण देश के आधुनिक इतिहास के सबसे खतरनाक स्तर पर है। फ्रांस पर पहले से ही यूरोपीय संघ के 3% घाटा सीमा का उल्लंघन करने के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है।
आर्मंड ने आगाह किया कि इस विशाल ऋण पर ब्याज चुकाने में फ्रांस को हर साल 50 अरब यूरो से अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं, जो शिक्षा और रक्षा बजट के लगभग बराबर है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय विश्वसनीयता बहाल करने के लिए कड़े वित्तीय फैसले लेने होंगे।
“हमारे सार्वजनिक वित्त की स्थिति बेहद गंभीर है, जो हमारे गणराज्य के इतिहास की सबसे चिंताजनक स्थितियों में से एक है। हमें साहस के साथ कड़े कदम उठाने होंगे।”
बार्नियर सरकार के सामने मितव्ययिता और यूरोपीय प्रतिबंधों की चुनौती
प्रधानमंत्री मिशेल बार्नियर की नई अल्पमत सरकार 2025 के लिए एक आपातकालीन बजट तैयार कर रही है, जिसमें कम से कम 30 अरब यूरो के खर्च में कटौती और नए टैक्स लगाने की योजना है। इसमें सरकारी भर्ती पर रोक, प्रशासनिक खर्च घटाना और अत्यधिक मुनाफा कमाने वाली कंपनियों पर विशेष लेवी लगाना शामिल है।
संसद में यह संकट बार्नियर सरकार के लिए पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन गया है। वामपंथी और दक्षिणपंथी दोनों विपक्षी गुटों ने चेतावनी दी है कि यदि मितव्ययिता का बोझ आम जनता या जनसेवाओं पर डाला गया, तो वे सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएंगे।




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