श्वसन चिकित्सा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने अनियंत्रित क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) से पीड़ित वयस्क मरीजों के लिए 'डुपिक्सेंट' (डुपिलुमब) को मंजूरी दे दी है। रेगेनेरॉन फार्मास्यूटिकल्स और सनोफी द्वारा विकसित डुपिक्सेंट, अमेरिका में सीओपीडी के इलाज के लिए स्वीकृत होने वाली अब तक की पहली लक्षित बायोलॉजिक दवा बन गई है।

सीओपीडी दुनिया भर में मृत्यु का चौथा प्रमुख कारण है, जिसमें वायुमार्ग में लगातार रुकावट आती है और सांस लेने में गंभीर तकलीफ होती है। मानक इनहेलर उपचार लेने के बावजूद अमेरिका में लगभग 3,00,000 मरीज टाइप 2 सूजन के कारण बार-बार अस्पताल में भर्ती होने को मजबूर होते हैं।

BOREAS और NOTUS क्लिनिकल परीक्षणों में प्रभावशाली सफलता

एफडीए की यह मंजूरी दो प्रमुख फेज 3 क्लिनिकल परीक्षणों - BOREAS और NOTUS के निर्णायक आंकड़ों पर आधारित है। इन अध्ययनों में पाया गया कि हर दो सप्ताह में डुपिक्सेंट का इंजेक्शन लेने वाले मरीजों में प्लेसबो की तुलना में सांस फूलने और बीमारी के गंभीर दौरों (एग्जैसॉर्बेशन) में 30 से 34 प्रतिशत तक की उल्लेखनीय कमी आई।

डुपिक्सेंट एक पूर्णतः मानव मोनोक्लोनल एंटीबॉडी है जो इंटरल्यूकिन-4 (IL-4) और इंटरल्यूकिन-13 (IL-13) के संकेतन मार्गों को अवरुद्ध करती है। ये दोनों प्रोटीन फेफड़ों में टाइप 2 सूजन को बढ़ाने वाले प्राथमिक कारक हैं, और दवा सीधे इस सूजन की जड़ पर वार करती है।

“This approval represents a historic breakthrough for hundreds of thousands of COPD patients who have lived for decades without a targeted biologic medicine to manage their debilitating lung disease.”

टाइप 2 वायुमार्ग सूजन के उपचार में युगांतरकारी बदलाव

सीओपीडी के लिए यह मंजूरी डुपिक्सेंट की बाजार क्षमता को व्यापक रूप से बढ़ाएगी, जो पहले से ही एक्जिमा, गंभीर अस्थमा और अन्य एलर्जी विकारों के लिए व्यापक रूप से उपयोग की जा रही है। वॉल स्ट्रीट के विश्लेषकों का अनुमान है कि इस नई स्वीकृति से सनोफी और रेगेनेरॉन की वार्षिक बिक्री में अरबों डॉलर का इजाफा होगा।

कंपनियों ने घोषणा की है कि डुपिक्सेंट को अमेरिका में डॉक्टर के पर्चे पर तत्काल उपलब्ध कराया जाएगा। पल्मोनोलॉजिस्टों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि अब रक्त परीक्षण में ईोसिनोफिल्स की बढ़ी हुई संख्या देखकर मरीजों को सटीक और लक्षित उपचार दिया जा सकेगा।

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