न्यूयॉर्क शहर में 79वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा और 'समिट ऑफ द फ्यूचर' के समानांतर 'क्लाइमेट वीक एनवाईसी 2024' का आज औपचारिक आगाज हुआ। इस प्रतिष्ठित वैश्विक मंच पर दुनिया भर के कॉर्पोरेट प्रमुख, पर्यावरण वैज्ञानिक, मंत्री और संस्थागत निवेशक एकत्रित हुए हैं ताकि कार्बन उत्सर्जन में कमी के व्यावहारिक समाधानों पर चर्चा की जा सके।
अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संगठन 'क्लाइमेट ग्रुप' द्वारा आयोजित इस वर्ष के शिखर सम्मेलन का मुख्य विषय 'इट्स टाइम' रखा गया है। इसका उद्देश्य केवल संकल्प लेने से आगे बढ़कर वास्तविक पूंजी निवेश सुनिश्चित करना है, विशेष रूप से 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने के वैश्विक लक्ष्य को हासिल करने के लिए।
विकासशील देशों में हरित पूंजी का विस्तार
हालांकि पिछले वर्ष स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में 1.8 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का निवेश हुआ, लेकिन इसका 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विकसित देशों और चीन तक ही सीमित रहा। लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और एशिया के विकासशील देशों में उच्च ब्याज दरों और ऋण जोखिमों के कारण सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं की गति धीमी है।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बहुपक्षीय विकास बैंकों ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं में पूंजी प्रवाह सुगम बनाने के लिए नए मिश्रित वित्तीय तंत्र पेश किए। इस पहल से हरित अवसंरचना में निजी निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
“बिना ठोस वित्तीय आवंटन के केवल संकल्प लेने का दौर अब समाप्त हो चुका है। हमारे पास तकनीकी समाधान मौजूद हैं, अब हमें वैश्विक वित्तीय प्रणाली को दुरुस्त करने की आवश्यकता है।”
बिजली ग्रिड का आधुनिकीकरण और ट्रांसमिशन सुधार
चर्चा का एक प्रमुख बिंदु बिजली ट्रांसमिशन ग्रिड का आधुनिकीकरण रहा। अमेरिका और यूरोप में भी नई सौर और पवन परियोजनाओं को ग्रिड से जोड़ने में चार से सात साल की देरी हो रही है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
विशेषज्ञों ने सरकारों से हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करंट (HVDC) लाइनों और ग्रिड-स्तरीय बैटरी भंडारण में निवेश तेज करने का आग्रह किया है। सप्ताह भर चलने वाले इस सम्मेलन में 600 से अधिक सत्रों के माध्यम से ठोस कार्ययोजनाएं तैयार की जाएंगी।




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