जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ ने यूरोपीय संघ के नेतृत्व से सीधा संपर्क साधते हुए बहुचर्चित यूरोपीय वन कटाई रोधी नियमन (EUDR) को फिलहाल स्थगित करने की सार्वजनिक मांग की है। बर्लिन में एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने यूरोपीय आयोग प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन से इसे टालने का अनुरोध किया।
यह कानून 30 दिसंबर 2024 से लागू होना निर्धारित है। इसके तहत मवेशी, कोको, कॉफी, पाम ऑयल, रबर, सोया और लकड़ी से बने उत्पादों के आयातकों को सैटेलाइट डेटा के जरिए यह साबित करना होगा कि उनका सामान हाल ही में काटे गए वनों की जमीन से नहीं आया है।
अत्यधिक कागजी कार्रवाई और तकनीकी खामियों पर कंपनियों का रोष
पर्यावरणविद् जहां इस नियम का समर्थन कर रहे हैं, वहीं जर्मन पुस्तक प्रकाशक, लकड़ी उद्योग और कृषि संघों ने चेतावनी दी है कि यूरोपीय संघ का आधिकारिक डिजिटल ट्रैकिंग पोर्टल अभी तक पूरी तरह तैयार नहीं है, जिससे भारी कानूनी जोखिम पैदा हो रहा है।
स्कोल्ज़ ने स्पष्ट किया कि जर्मनी पर्यावरण संरक्षण का पक्षधर है, लेकिन ऐसे नियम नहीं थोपे जाने चाहिए जो स्थानीय उद्योगों की कमर तोड़ दें। उन्होंने कहा कि कागजी कार्रवाई के बोझ से छपाई का कागज दुर्लभ हो सकता है।
“वनों की कटाई रोकने का नियम व्यावहारिक होना चाहिए। मैंने आयोग प्रमुख से कहा है कि जब तक कंपनियों की शंकाएं दूर नहीं हो जातीं, इसे स्थगित रखा जाए।”
वैश्विक व्यापारिक साझेदारों का दबाव और यूरोपीय आयोग की दुविधा
जर्मनी के इस रुख से पहले अमेरिका, ब्राजील, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे वैश्विक साझेदारों ने भी औपचारिक कूटनीतिक आपत्ति दर्ज कराई थी और इसे एकतरफा व्यापारिक बाधा करार दिया था।
यूरोपीय आयोग ने चांसलर के बयान का संज्ञान लिया है और माना है कि तकनीकी तैयारी की चुनौतियों को देखते हुए नियमों के क्रियान्वयन में कुछ राहत देने पर विचार किया जा रहा है।




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