न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में शुक्रवार को 130 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शासन प्रमुख ऐतिहासिक 'समिट ऑफ द फ्यूचर' में भाग लेने के लिए एकत्र हुए। 79वीं यूएन महासभा के उच्च स्तरीय सत्र से पहले आयोजित इस दो दिवसीय शिखर सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक संस्थाओं को 21वीं सदी की चुनौतियों के अनुरूप ढालना है।
इस ऐतिहासिक सम्मेलन का मुख्य आकर्षण 'पैक्ट फॉर द फ्यूचर' (भविष्य का समझौता) को औपचारिक रूप से अपनाना है। जर्मनी और नामीबिया की मध्यस्थता में तैयार किए गए इस दस्तावेज में 56 ठोस कार्ययोजनाएं शामिल हैं, जिनके साथ ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट और भावी पीढ़ियों के लिए घोषणापत्र संलग्न हैं।
वैश्विक बहुपक्षवाद के पुनरुद्धार की व्यापक रूपरेखा
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने यूक्रेन, गाजा और सूडान में जारी युद्धों, जलवायु संकट और अनियंत्रित उभरती तकनीकों का हवाला देते हुए विश्व नेताओं से भू-राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर एकजुट होने का भावुक आह्वान किया।
इस समझौते का एक बड़ा मील का पत्थर 'ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट' है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के नियमन पर पहला बहुपक्षीय समझौता है। इसके तहत आईपीसीसी की तर्ज पर एआई के लिए एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल स्थापित करने की रूपरेखा तैयार की गई है।
“हम अपने दादा-परदादाओं द्वारा बनाई गई पुरानी व्यवस्था के साथ अपने पोते-पोतियों के लिए बेहतर भविष्य नहीं बना सकते। यह सम्मेलन 21वीं सदी के लिए बहुपक्षवाद को नया रूप देने का अवसर है।”
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सुरक्षा परिषद में ऐतिहासिक सुधार
समझौते में 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार करने और विशेष रूप से अफ्रीकी देशों को इसमें उचित प्रतिनिधित्व देने का संकल्प दोहराया गया है। इसके अलावा विश्व बैंक और आईएमएफ जैसे वैश्विक वित्तीय संस्थानों में विकासशील देशों की आवाज बुलंद करने की बात कही गई है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष फिलेमोन यांग ने पुष्टि की कि इस व्यापक समझौते पर अधिकांश देशों के बीच आम सहमति बन चुकी है, जिससे एक नए वैश्विक कूटनीतिक युग की शुरुआत हो रही है।




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