भारतीय शेयर बाजार ने 24 सितंबर 2026 को वित्तीय इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया, जब मानक सूचकांक बीएसई सेंसेक्स पहली बार 85,000 के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 ने 26,000 के स्तर को भेद दिया। मुंबई के दलाल स्ट्रीट पर शुरुआती कारोबारी सत्र से ही जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 85,163.23 के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जबकि 50 शेयरों वाले निफ्टी ने 26,011.30 का रिकॉर्ड स्तर छूकर निवेशकों में भारी खुशी की लहर पैदा कर दी।
इस ऐतिहासिक तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में की गई 50 आधार अंकों की कटौती के बाद शुरू हुई वैश्विक तरलता की लहर है। डॉलर इंडेक्स में नरमी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय इक्विटी में आक्रामक पूंजी झोंक दी है। भारत की मजबूत जीडीपी वृद्धि दर और राजनीतिक स्थिरता को देखते हुए वैश्विक फंड प्रबंधकों ने भारतीय शेयरों को उभरते बाजारों में सबसे सुरक्षित और आकर्षक विकल्प माना है।
दलाल स्ट्रीट पर ऐतिहासिक उछाल और वैश्विक तरलता का प्रभाव
मंगलवार के कारोबारी सत्र में मेटल (धातु) शेयरों ने बाजार की तेजी की कमान संभाली। चीन द्वारा बड़े आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा के बाद वैश्विक स्तर पर कमोडिटी की कीमतों में उछाल आया, जिसका सीधा फायदा टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज जैसी दिग्गज कंपनियों को मिला। इसके साथ ही आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और भारती एयरटेल जैसे वित्तीय व टेलीकॉम दिग्गजों में भी जोरदार लिवाली दर्ज की गई, जिसने सूचकांकों को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचाया।
घरेलू संस्थागत निवेशकों और खुदरा निवेशकों की मासिक एसआईपी (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) ने बाजार को एक अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान किया है। भारत में मासिक एसआईपी प्रवाह 23,500 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है, जिससे किसी भी वैश्विक गिरावट का असर भारतीय बाजारों पर न्यूनतम रहता है। इस तेजी के साथ बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 5.6 ट्रिलियन डॉलर (475 लाख करोड़ रुपये से अधिक) के नए रिकॉर्ड स्तर को छू गया।
“85,000 का स्तर पार करना एक असाधारण मनोवैज्ञानिक मील का पत्थर है, जो भारत के वृहद आर्थिक बुनियादी ढांचे की मजबूती और घरेलू नकदी के अटूट प्रवाह को रेखांकित करता है।”
क्षेत्रीय शेयरों का प्रदर्शन, मूल्यांकन और वृहद आर्थिक मजबूती
शेयर बाजार के इस अभूतपूर्व उत्सव के बीच बाजार विश्लेषक ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह भी दे रहे हैं। निफ्टी 50 का एक वर्षीय फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग्स (पी/ई) अनुपात 22.8 से ऊपर पहुंच गया है, जो इसके ऐतिहासिक 10-वर्षीय औसत से काफी अधिक है। विश्लेषकों का कहना है कि बैंकिंग और ऑटो क्षेत्र के बेहतर नतीजों से मौजूदा मूल्यांकन को कुछ हद तक सहारा जरूर मिलता है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव या कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से अल्पकालिक उतार-चढ़ाव आ सकता है।
बहरहाल, भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा को लेकर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक पूरी तरह आश्वस्त हैं। देश की लगभग 7 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि, बुनियादी ढांचे पर सरकारी पूंजीगत व्यय और एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में भारत का बढ़ता भारांक यह साबित करता है कि भारतीय बाजार अब केवल वैश्विक संकेतों पर निर्भर नहीं है। सेंसेक्स का 85,000 और निफ्टी का 26,000 पर पहुंचना भारत की आर्थिक ताकत का एक नया प्रमाण है।




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