स्वीडन की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी वोल्वो कार्स ने आधिकारिक तौर पर 2030 तक केवल पूरी तरह से इलेक्ट्रिक गाड़ियां बेचने के अपने लक्ष्य को छोड़ दिया है। ग्राहकों की घटती दिलचस्पी और चार्जिंग बुनियादी ढांचे की धीमी गति के कारण यह कदम उठाने वाली वोल्वो ताज़ा वैश्विक कंपनी बन गई है।
चीन के गीली होल्डिंग के स्वामित्व वाली गोथेनबर्ग स्थित कंपनी ने मंगलवार को घोषणा की कि अब उसका लक्ष्य 2030 तक वैश्विक बिक्री का 90% से 100% हिस्सा विद्युतीकृत मॉडलों (प्योर इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड) से हासिल करना है। शेष 10% हिस्से में आवश्यकतानुसार माइल्ड-हाइब्रिड कारें शामिल हो सकती हैं।
विद्युतीकरण की समयसीमा में व्यावहारिक बदलाव
2021 में घोषित अपनी पिछली योजना के तहत वोल्वो ने इस दशक के अंत तक हाइब्रिड सहित सभी आंतरिक दहन इंजनों (ICE) को पूरी तरह समाप्त करने की घोषणा की थी। हालांकि, प्रमुख यूरोपीय और अमेरिकी बाजारों में मांग शुरुआती अनुमानों के अनुरूप नहीं रही।
वोल्वो प्रबंधन ने इस रणनीति बदलाव के पीछे कई व्यावहारिक कारणों को गिनाया। सार्वजनिक हाई-स्पीड चार्जिंग स्टेशनों की धीमी स्थापना, जर्मनी जैसे प्रमुख बाजारों में ईवी सब्सिडी का अचानक बंद होना और चीनी निर्मित बैटरी वाहनों पर नए आयात शुल्क से ग्राहकों का रुझान धीमा पड़ा है।
“हमारा यह दृढ़ विश्वास है कि भविष्य इलेक्ट्रिक का ही है। हालांकि, यह साफ है कि विद्युतीकरण का यह सफर सीधा नहीं होगा और ग्राहक तथा बाजार अलग-अलग गति से आगे बढ़ रहे हैं।”
बुनियादी ढांचे की कमी और नीतियों के बदलाव से बदली रणनीति
इस बदली रणनीति के तहत वोल्वो ने अपनी बेहद लोकप्रिय XC60 और XC90 हाइब्रिड एसयूवी श्रृंखला को अपग्रेड करने के लिए नए निवेश की घोषणा की है। प्लग-इन हाइब्रिड वाहन, जो शहरों में बैटरी और लंबी यात्राओं में पेट्रोल इंजन का विकल्प देते हैं, ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहे हैं।
वोल्वो का यह फैसला मर्सिडीज-बेंज, फोर्ड, जनरल मोटर्स और टोयोटा जैसी वैश्विक ऑटो कंपनियों द्वारा अपनी ईवी प्राथमिकताओं के पुनर्मूल्यांकन जैसा ही है। इस संशोधन के बावजूद, 2024 की दूसरी तिमाही में वोल्वो की कुल बिक्री में शुद्ध इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी 26% रही, जो पारंपरिक निर्माताओं में सबसे अधिक है।




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