दक्षिण कोरिया की नेशनल असेंबली ने गुरुवार को यौन हिंसा रोकथाम और पीड़ित संरक्षण अधिनियम में ऐतिहासिक संशोधनों को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी। नए कानून के तहत डीपफेक अश्लील सामग्री रखने, खरीदने, स्टोर करने या जानबूझकर देखने पर सख्त आपराधिक सजा का प्रावधान किया गया है। 300 सदस्यीय संसद में इस विधेयक के पक्ष में 241 वोट पड़े, जबकि केवल एक सांसद ने इसके विरोध में मतदान किया।

नए कानून के अनुसार, किसी की सहमति के बिना बनाए गए डीपफेक यौन वीडियो या फोटो रखने, खरीदने, सहेजने या देखने के दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को तीन साल तक की जेल या तीन करोड़ वॉन (लगभग 22,600 डॉलर) तक के जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। इससे पहले दक्षिण कोरियाई कानून में केवल डीपफेक बनाने और बांटने वालों पर सजा का प्रावधान था, जिससे उपभोक्ताओं पर कार्रवाई नहीं हो पाती थी।

सिंथेटिक मीडिया के निर्माताओं और उपभोक्ताओं दोनों पर सख्त कानूनी शिकंजा

इस विधायी सुधार में डीपफेक बनाने और प्रसारित करने वालों के लिए भी सजा को काफी कड़ा कर दिया गया है। आपत्तिजनक सामग्री तैयार करने या प्रसारित करने की अधिकतम सजा पांच साल से बढ़ाकर सात साल कर दी गई है। वहीं, अगर यह अपराध व्यावसायिक लाभ या पैसे कमाने के इरादे से किया गया हो, तो कम से कम तीन साल और अधिकतम 10 साल की कैद होगी।

यह कानून महीनों के राष्ट्रव्यापी जनाक्रोश के बाद आया है, जब टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स पर गुप्त चैट समूहों के विशाल नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ था। इन समूहों में स्कूली छात्राओं, विश्वविद्यालय की युवतियों, महिला सैनिकों और आम नागरिकों की सोशल मीडिया तस्वीरों को चुराकर अश्लील डीपफेक बनाए जा रहे थे।

“This landmark legislation sends an unequivocal message that digital sex crimes utilizing synthetic media are grave human rights violations that will be met with severe criminal punishment.”

टेलीग्राम चैटग्रुप्स में बड़े पैमाने पर हुए उत्पीड़न के बाद देशव्यापी आक्रोश

आपराधिक सजाओं के साथ-साथ संसद ने दूरसंचार कानून में भी संशोधन किया है, जिसके तहत घरेलू और विदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को नियामक आदेश मिलने पर तुरंत ऐसी सामग्री को हटाना होगा। आदेश की अवहेलना करने वाले प्लेटफॉर्म्स और उनके अधिकारियों पर भारी प्रशासनिक जुर्माना लगाया जाएगा।

मानवाधिकार संगठनों और पीड़ित सहायता समूहों ने इस कानून का स्वागत करते हुए इसे डिजिटल युग में महिलाओं और युवाओं की गरिमा की रक्षा के लिए एक जरूरी सुरक्षा कवच बताया है। महिला एवं परिवार मंत्रालय तथा राष्ट्रीय पुलिस एजेंसी ने कानून को सख्ती से लागू करने के लिए विशेष कार्यबल गठित किया है।

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