भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड के बहुप्रतीक्षित 3 अरब डॉलर (लगभग 25,000 करोड़ रुपये) के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को औपचारिक नियामक मंजूरी प्रदान कर दी है। पूंजी बाजार नियामक ने 24 सितंबर 2026 को अपना औपचारिक अवलोकन पत्र जारी करते हुए दक्षिण कोरियाई वाहन निर्माता की पूर्ण स्वामित्व वाली भारतीय इकाई के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस को हरी झंडी दे दी। इस ऐतिहासिक मंजूरी के साथ ही भारतीय वित्तीय बाजार के इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

यह ऐतिहासिक सार्वजनिक निर्गम पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के रूप में तैयार किया गया है, जिसके तहत दक्षिण कोरिया की मूल कंपनी हुंडई मोटर कंपनी 14,21,94,700 इक्विटी शेयरों की बिक्री करेगी। यह हिस्सेदारी भारतीय अनुषंगी कंपनी की चुकता इक्विटी पूंजी का लगभग 17.5 प्रतिशत है। इसमें कोई नया शेयर जारी नहीं किया जाएगा, जिससे जुटाई जाने वाली पूरी राशि मूल कंपनी को जाएगी। यह निर्गम मई 2022 में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) द्वारा बनाए गए 21,000 करोड़ रुपये के पिछले भारतीय रिकॉर्ड को आसानी से पीछे छोड़ देगा।

नियामक मंजूरी और भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े निर्गम का पैमाना

नियामक की यह हरी झंडी भारत के प्राथमिक पूंजी बाजार के लिए एक युगांतरकारी क्षण है, क्योंकि वर्ष 2003 में मारुति सुजुकी के ऐतिहासिक पदार्पण के बाद पिछले दो दशकों में पहली बार किसी प्रमुख बहुराष्ट्रीय वाहन निर्माता ने घरेलू शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने का कदम उठाया है। कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटीग्रुप, एचएसबीसी सिक्योरिटीज, जेपी मॉर्गन और मॉर्गन स्टेनली के नेतृत्व वाला सिंडिकेट इस निर्गम का प्रबंधन कर रहा है। बाजार सूत्रों के अनुसार हुंडई मोटर इंडिया का मूल्यांकन 18 से 20 अरब डॉलर के बीच तय होने की उम्मीद है।

वर्ष 1996 में चेन्नई के पास श्रीपेरंबदूर में अपना विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के बाद से हुंडई ने भारत में एक विशाल औद्योगिक साम्राज्य खड़ा किया है। आज भारत दक्षिण कोरिया के बाहर हुंडई का दूसरा सबसे बड़ा वैश्विक उत्पादन आधार बन चुका है, जो कंपनी की वैश्विक बिक्री में लगभग 14 प्रतिशत का योगदान देता है। कंपनी ने भारत में स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल्स (एसयूवी) की भारी मांग का पूरा लाभ उठाया है, जहां क्रेटा, वेन्यू और एक्सटर जैसे लोकप्रिय मॉडल उसकी कुल घरेलू बिक्री का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बनाते हैं।

“सेबी का अवलोकन पत्र प्राप्त करना हमारी 28 वर्षों की भारतीय यात्रा में एक ऐतिहासिक पड़ाव है, जो स्थानीयकरण, विनिर्माण उत्कृष्टता और शेयरधारक मूल्य निर्माण के प्रति हमारी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।”

दो दशकों का स्थानीयकरण, एसयूवी दबदबा और ऑटोमोबाइल उद्योग पर प्रभाव

हुंडई अपनी उत्पादन क्षमता और हरित गतिशीलता में भारी पूंजी निवेश करके घरेलू विस्तार को तेज कर रही है। कंपनी ने हाल ही में महाराष्ट्र के तालेगांव में जनरल मोटर्स के विनिर्माण संयंत्र का अधिग्रहण पूरा किया है, जिससे 2025 तक भारत में उसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता बढ़कर 10 लाख यूनिट तक पहुंच जाएगी। पारंपरिक इंजनों के अलावा, हुंडई स्थानीय इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बैटरी पैक असेंबली, घरेलू आपूर्ति श्रृंखला और देश भर के प्रमुख शहरों में चार्जिंग नेटवर्क स्थापित करने के लिए 26,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर रही है।

वित्तीय विश्लेषक सेबी की इस मंजूरी को भारतीय पूंजी बाजार की गहराई और परिपक्वता के एक सशक्त प्रमाण के रूप में देख रहे हैं। यह दर्शाता है कि घरेलू बाजार बिना किसी तरलता संकट के मेगा-कैप अंतरराष्ट्रीय लिस्टिंग को संभालने में पूरी तरह सक्षम है। इस सफल लिस्टिंग से अन्य वैश्विक बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भी अपनी भारतीय इकाइयों को सूचीबद्ध करने की प्रेरणा मिलेगी। मुंबई, लंदन और न्यूयॉर्क में आगामी रोड शो के बीच वैश्विक निवेशकों की उत्सुकता भारत के उपभोग बूम और औद्योगिक पुनर्जागरण में उनके दृढ़ विश्वास को दर्शाती है।

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