माइक्रोसॉफ्ट के स्वामित्व वाले दुनिया के सबसे बड़े पेशेवर सोशल नेटवर्क लिंक्डइन को यूरोप में कड़े नियामकीय विरोध का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी पर आरोप है कि उसने बिना स्पष्ट पूर्व सूचना के उपयोगकर्ताओं के प्रोफाइल, पोस्ट, लेख और बायोडाटा का उपयोग अपने जेनेरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए करना शुरू कर दिया था।

यह विवाद तब सामने आया जब साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने पाया कि लिंक्डइन की सेटिंग्स में 'जेनेरेटिव एआई सुधार के लिए डेटा' नामक एक नया विकल्प जोड़ा गया था, जो करोड़ों उपयोगकर्ताओं के खातों में पहले से ही चालू (डिफॉल्ट ऑन) था। कंपनी ने अपनी सेवा शर्तों को औपचारिक रूप से अपडेट करने से पहले ही यह कदम उठा लिया था।

चुपचाप गोपनीयता नियमों में बदलाव और डिफॉल्ट डेटा संग्रह

इस नीति के तहत पेशेवर बायोडाटा, यूजर इंटरेक्शन और पोस्ट को लिंक्डइन और उसकी मूल कंपनी माइक्रोसॉफ्ट द्वारा अपने एआई राइटिंग असिस्टेंट और जॉब रिकमेंडेशन एल्गोरिदम को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।

ब्रिटेन के डेटा गोपनीयता नियामक, इंफॉर्मेशन कमिश्नर्स ऑफिस (ICO) ने इस पर तत्काल कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। नियामक के कड़े रुख के बाद लिंक्डइन ने आधिकारिक तौर पर सहमति व्यक्त की कि जब तक नियामकीय समीक्षा पूरी नहीं हो जाती, वह ब्रिटिश उपयोगकर्ताओं के डेटा का एआई ट्रेनिंग के लिए उपयोग नहीं करेगा।

“कंपनियों को अपने उपयोगकर्ताओं के साथ पूरी तरह पारदर्शी होना चाहिए कि उनके व्यक्तिगत डेटा का उपयोग कैसे किया जा रहा है। हम लिंक्डइन द्वारा जांच जारी रहने तक डेटा संग्रह रोकने के निर्णय का स्वागत करते हैं।”

यूरोपीय नियामकों की कड़ी आपत्ति और कानूनी सहमति के सवाल

इसके साथ ही आयरलैंड के डेटा प्रोटेक्शन कमीशन (DPC)—जो यूरोपीय संघ के सख्त जीडीपीआर नियमों के तहत लिंक्डइन का प्रमुख नियामक है—ने भी इस बात की औपचारिक पड़ताल शुरू कर दी है कि क्या कंपनी के पास यूजर्स के डेटा का व्यावसायिक उपयोग करने का कोई वैध कानूनी आधार था।

यद्यपि लिंक्डइन का कहना है कि उसने सख्त यूरोपीय कानूनों के कारण यूरोपीय संघ और स्विट्जरलैंड के उपयोगकर्ताओं को इस डिफॉल्ट ट्रेनिंग से बाहर रखा था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय उपयोगकर्ताओं के डेटा को बिना उनकी स्पष्ट अनुमति के इस्तेमाल करने पर डिजिटल अधिकार कार्यकर्ताओं ने गंभीर चिंता जताई है।

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