अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने सौर मंडल के सबसे दूरस्थ हिस्से में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोज की है। खगोलविदों ने प्लूटो के सबसे बड़े चंद्रमा कैरन की जमी हुई सतह पर कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन पेरोक्साइड के रासायनिक स्पेक्ट्रा का पता लगाया है।
नेचर कम्युनिकेशंस पत्रिका में प्रकाशित इस शोध का नेतृत्व साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट की अंतरराष्ट्रीय टीम ने किया। इससे पहले 2015 में नासा के न्यू हॉराइजन्स अंतरिक्ष यान ने कैरन का करीबी अध्ययन किया था, लेकिन उसके उपकरण 2.5 माइक्रोन से आगे देखने में सक्षम नहीं थे।
कुइपर बेल्ट में रेडियोलिसिस और अंतरिक्षीय मौसम
जेम्स वेब के नियर-इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोग्राफ ने 5.2 माइक्रोन तक के इन्फ्रारेड प्रकाश में कैरन का अध्ययन किया। इससे पता चला कि चंद्रमा की बर्फीली सतह के ऊपर कार्बन डाइऑक्साइड की एक पतली परत मौजूद है, जो प्राचीन काल में उल्कापिंडों के टकराने से बाहर निकली थी।
वैज्ञानिकों के लिए सबसे अधिक चौंकाने वाली खोज हाइड्रोजन पेरोक्साइड की उपस्थिति रही। प्रयोगशाला परीक्षणों से स्पष्ट हुआ कि यह रेडियोलिसिस नामक प्रक्रिया के कारण बना है, जिसमें सौर पराबैंगनी किरणें और ब्रह्मांडीय विकिरण पानी के अणुओं को तोड़कर हाइड्रोजन पेरोक्साइड बनाते हैं।
“कैरन कुइपर बेल्ट का अकेला ऐसा पिंड है जिसके भूवैज्ञानिक आंकड़े हमारे पास हैं। वेब की इन्फ्रारेड संवेदनशीलता हमें सूर्य से अरबों मील दूर होने वाली रासायनिक क्रियाओं को समझने का अवसर देती है।”
सौर मंडल के निर्माण के रहस्यों की नई परतें
यह खोज साबित करती है कि शून्य से 390 डिग्री फ़ारेनहाइट नीचे के भीषण ठंड वाले वातावरण में भी बाहरी सौर मंडल की सतहों पर लगातार रासायनिक परिवर्तन हो रहे हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अध्ययन अन्य सुदूर खगोलीय पिंडों और कुइपर बेल्ट में मौजूद बर्फीले ग्रहों के रासायनिक विकास को समझने के लिए एक नया पैमाना स्थापित करता है।




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