मैड्रिड के कॉम्प्लूटेंस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने गणना की है कि पृथ्वी को सितंबर के अंत में कुछ समय के लिए एक दूसरा चंद्रमा मिलेगा। 2024 PT5 नामक यह क्षुद्रग्रह लगभग 10 से 11 मीटर चौड़ा है।

इसे 7 अगस्त को दक्षिण अफ्रीका में नासा समर्थित एटलस वेधशाला द्वारा खोजा गया था। धीमी गति के कारण यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में खिंच आया है।

गुरुत्वाकर्षण खिंचाव और अनोखा कक्षीय पथ

यह मुख्य चंद्रमा की तरह स्थायी नहीं रहेगा, बल्कि 29 सितंबर से 25 नवंबर तक 57 दिनों के लिए घोड़े की नाल जैसे पथ पर चक्कर लगाकर फिर सौर कक्षा में लौट जाएगा।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पिंड अर्जुन एस्टेरॉयड बेल्ट का हिस्सा है और संभवतः प्राचीन काल में चंद्रमा पर हुए किसी बड़े टकराव का मलबा हो सकता है।

“पृथ्वी कभी-कभी निकटवर्ती क्षुद्रग्रहों को अपनी कक्षा में खींच लेती है। यह पिंड सूर्य की कक्षा में लौटने से पहले 57 दिन हमारे साथ रहेगा।”

अर्जुन क्षुद्रग्रह बेल्ट से हुआ इसका उद्भव

यह इतना छोटा और धुंधला है कि इसे नंगी आंखों या साधारण घरेलू टेलीस्कोप से नहीं देखा जा सकेगा। इसके लिए कम से कम 30 इंच वाले विशाल शोध दूरबीनों की जरूरत होगी।

नवंबर में पृथ्वी से दूर जाने के बाद यह जनवरी 2025 में एक बार फिर पास से गुजरेगा और फिर 2055 तक लौटकर नहीं आएगा।

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