यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी के विनिर्माण क्षेत्र में सितंबर के दौरान भारी गिरावट दर्ज की गई। एसएंडपी ग्लोबल द्वारा जारी किए गए प्रारंभिक सर्वेक्षण आंकड़ों के अनुसार, जर्मनी का एचसीओबी मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) अगस्त के 42.4 से फिसलकर 40.3 के स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले 12 महीनों का सबसे निचला स्तर है।

यह सूचकांक लगातार विकास और संकुचन को अलग करने वाले 50.0 के स्तर से काफी नीचे बना हुआ है। इस तीव्र गिरावट ने उन उम्मीदों को तोड़ दिया है कि जर्मन उद्योग में सुधार शुरू हो चुका है। ऑटोमोबाइल, औद्योगिक मशीनरी और रासायनिक क्षेत्रों में नए ऑर्डरों की कमी के कारण उत्पादन तेजी से गिरा है।

निर्यात क्षेत्रों और फैक्ट्री ऑर्डरों में तेज गिरावट

सर्वेक्षण के आंकड़ों से पता चला है कि अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों से मिलने वाले नए निर्यात ऑर्डरों में भारी कमी आई है। कंपनियों ने चीन में मांग की सुस्ती, उत्तरी अमेरिका में आर्थिक सतर्कता और यूरोज़ोन में पूंजी निवेश की कमी को इसका प्रमुख कारण बताया है।

कारखानों में रोजगार के स्तर में भी भारी कटौती देखी गई। महामारी के बाद से औद्योगिक संयंत्रों में नौकरियों में यह सबसे तेज मासिक गिरावट है। उत्पादन लागत को नियंत्रित करने के लिए प्रबंधन ने नई भर्तियों पर रोक लगा दी है और कर्मचारियों को समय से पहले सेवानिवृत्ति दी जा रही है।

“जर्मनी के विनिर्माण क्षेत्र में मंदी काफी गहरी हो गई है। उत्पादन में इस भारी गिरावट के बाद वर्ष 2024 के लिए तकनीकी मंदी से बचना अब लगभग असंभव लगता है।”

संरचनात्मक संकट और उद्योगों के पलायन की बढ़ती चिंताएं

अगले 12 महीनों के कारोबारी दृष्टिकोण को लेकर उद्योगपतियों का भरोसा इस साल पहली बार नकारात्मक दायरे में चला गया। व्यापारिक अधिकारियों ने चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा, महंगी घरेलू बिजली और यूरोपीय संघ के जटिल नियमों को अपनी सबसे बड़ी समस्या बताया।

इन निराशाजनक आंकड़ों से बर्लिन में चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ की गठबंधन सरकार पर दबाव काफी बढ़ गया है। जर्मन उद्योग परिसंघों (BDI और VDA) ने देश में गैर-औद्योगीकरण के खतरे को टालने के लिए बिजली की दरों पर तत्काल सब्सिडी और कॉर्पोरेट करों में कटौती की मांग दोहराई है।

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