मिस्र के पुरावशेष सर्वोच्च परिषद के तहत काम कर रहे पुरातात्विक दल ने न्यू वैली प्रांत के दखला ओएसिस स्थित मुत शहर के बीर अल-शघाला स्थल पर रोमन काल के दो असाधारण मकबरे खोज निकाले हैं। मिट्टी की धूप में सुखाई गई ईंटों से बने ये मकबरे पारंपरिक मिस्र की अंत्येष्टि प्रथाओं और ग्रीको-रोमन स्थापत्य शैली के अद्भुत समन्वय को उजागर करते हैं।
पर्यटन और पुरावशेष मंत्रालय द्वारा जारी विवरण के अनुसार, इन दोनों मकबरों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी पिरामिड के आकार की छतें हैं। मिस्र के पश्चिमी रेगिस्तानी ओएसिस में रोमन काल के प्रांतीय मकबरों पर पिरामिड नुमा अधिरचना का मिलना अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक माना जाता है।
वास्तुकला का चमत्कार और कच्ची ईंटों पर प्राचीन चित्र
पहले मकबरे के भीतर सीढ़ियां एक मुख्य मेहराबदार दफन कक्ष तक जाती हैं, जिसके दोनों ओर दो छोटे कमरे बने हैं। प्लास्टर की हुई दीवारों पर प्राचीन मिस्र के देवताओं के ज्वलंत रंगीन भित्तिचित्र आज भी सुरक्षित हैं, जिनमें अनुबिस द्वारा हृदय का वजन करने और ओसिरिस की उपस्थिति के दृश्य शामिल हैं।
दूसरे मकबरे के प्रवेश द्वार पर बलुआ पत्थर से बनी एक बड़ी वेदी मिली है, जिसका उपयोग अंतिम संस्कार के दौरान जल अर्पण और धार्मिक कर्मकांडों के लिए किया जाता था। उत्खनन में मिट्टी के दीये, कांच की इत्र की बोतलें और सिक्कों के अवशेष भी प्राप्त हुए हैं।
“These pyramid-topped tombs reveal the unique architectural fusion between traditional Egyptian funerary customs and Greco-Roman artistic influences in the Western Desert oases.”
पश्चिमी रेगिस्तान के व्यापारिक और धार्मिक प्रभाव
बीर अल-शघाला क्षेत्र प्राचीन काल से ही व्यापारिक कारवां मार्गों का प्रमुख पड़ाव रहा है और यहां पहले भी कई ऐतिहासिक कब्रिस्तान मिले हैं। इन मकबरों पर पिरामिड जैसी संरचना यह साबित करती है कि रोमन शासन के दौरान भी स्थानीय कुलीन वर्ग अपनी प्राचीन मिस्री धार्मिक मान्यताओं को गौरव के साथ संजोए हुए था।
रेगिस्तान के बदलते तापमान से भित्तिचित्रों के प्राकृतिक रंगों को सुरक्षित रखने के लिए विशेषज्ञों ने रासायनिक संरक्षण कार्य शुरू कर दिया है। मंत्रालय की योजना इन अवशेषों को स्थानीय संग्रहालयों में प्रदर्शित करने और स्थल को पुरातात्विक पर्यटन मानचित्र पर विकसित करने की है।




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