मिस्र के पर्यटन और पुरावशेष मंत्रालय ने 24 सितंबर, 2026 को घोषणा की कि एक मिस्री पुरातत्व मिशन ने बेहेरा प्रांत के होश इस्सा में तेल अल-अबकैन स्थल पर 3,200 साल पुरानी एक विशाल सैन्य छावनी की खोज की है। न्यू किंगडम काल की यह चौकी महान फिरौन रामसेस द्वितीय (Ramesses II) के शासनकाल में मिस्र की सीमा सुरक्षा रणनीति पर महत्वपूर्ण प्रकाश डालती है।
मिट्टी की धूप में सुखाई गई ईंटों से बना यह परिसर सैनिकों के रहने के कमरों (बैरक), शस्त्रागार, अन्न भंडारों और बड़े रसोई चूल्हों से सुसज्जित है। इसका स्थापत्य दो समान भागों में बंटा हुआ था, जिससे सैनिकों के अनुशासित रहने और हथियारों को सुरक्षित रखने की उन्नत व्यवस्था का प्रमाण मिलता है।
पश्चिमी सीमा की सुरक्षा: प्राचीन मिस्र की रणनीतिक किलेबंदी
नील डेल्टा की पश्चिमी सीमा पर स्थित यह किला प्राचीन मिस्र के लिए सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण था। इसका उपयोग पश्चिमी सीमा पार से लीबियाई कबीलों और भूमध्य सागर के रास्ते आने वाले 'सी पीपल्स' (समुद्री हमलावरों) के आक्रमणों को रोकने के लिए किया जाता था।
खुदाई में मिली सबसे असाधारण कलाकृतियों में एक कांस्य की तलवार है, जिस पर रामसेस द्वितीय का शाही नाम (कार्टूश) उकेरा गया है। हथियारों के एक कमरे में मिली यह तलवार आज भी अपनी धार और बनावट के साथ सुरक्षित अवस्था में है, जिसके साथ कटारें और भालों के नुकीले हिस्से भी मिले हैं।
“यह खोज विदेशी आक्रमणों के खिलाफ मिस्र की उत्तर-पश्चिमी सीमाओं की रक्षा के लिए रामसेस द्वितीय के शासनकाल के दौरान स्थापित रणनीतिक किलेबंदी का असाधारण पुरातात्विक प्रमाण प्रस्तुत करती है।”
शाही शस्त्रागार, सैनिकों की जीवनशैली और रामसेस द्वितीय की कांस्य तलवार
शोधकर्ताओं को सैनिकों के दैनिक उपयोग की कई वस्तुएं भी मिली हैं, जिनमें कार्नेलियन और फिरोजा के ताबीज, अमुन-रा के नाम वाले स्कारब, हाथीदांत के प्रसाधन उपकरण और जले हुए अनाज के अवशेष से भरे मिट्टी के बर्तन शामिल हैं।
सुप्रीम काउंसिल ऑफ एंटीक्विटीज की टीम इस स्थल पर अपनी खुदाई जारी रखेगी ताकि किले की बाहरी दीवारों और निगरानी मीनारों का खाका खींचा जा सके। बरामद की गई तलवार को गीजा के ग्रैंड इजिप्शियन म्यूजियम में प्रदर्शित किया जाएगा।




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