यूरोपीय परमाणु अनुसंधान संगठन (CERN) ने आज कण भौतिकी के इतिहास में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए जिनेवा के निकट 27 किलोमीटर लंबी सुरंग में अगली पीढ़ी के अंतिम सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट को सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया।

यह उपलब्धि 'हाई-ल्यूमिनोसिटी एलएचसी' (HL-LHC) परियोजना का एक महत्वपूर्ण चरण है, जिसका लक्ष्य 2029 तक प्रोटॉन टकरावों की संख्या को 10 गुना बढ़ाना है।

12 टेस्ला का शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र

नए मैग्नेट नियोबियम-टिन (Nb3Sn) के अत्याधुनिक सुपरकंडक्टर से बने हैं, जो माइनस 271.3 डिग्री सेल्सियस पर 12 टेस्ला से अधिक का प्रचंड चुंबकीय क्षेत्र पैदा करते हैं।

यह तीव्र चुंबकीय खिंचाव प्रोटॉन बीम को एक बाल की चौड़ाई से भी पतले बिंदु पर केंद्रित करने में सक्षम है, जिससे टकराव की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

“इन अत्याधुनिक मैग्नेटों की सफल स्थापना वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग की विजय है और नए भौतिकी युग का मार्ग प्रशस्त करती है।”

हिग्स बोसॉन और डार्क मैटर की खोज में तेजी

इस अपग्रेड के बाद वैज्ञानिक प्रति वर्ष 1.5 करोड़ से अधिक हिग्स बोसॉन कणों का अध्ययन कर सकेंगे, जिससे ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों से पर्दा उठ सकेगा।

आगामी महीनों में इन मैग्नेटों के परीक्षण जारी रहेंगे ताकि 2029 में पूरी क्षमता के साथ प्रोटॉन बीम का संचालन शुरू किया जा सके।

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