चीन के उत्तर-पश्चिमी शिनजियांग प्रांत में तारिम बेसिन की 3,600 साल पुरानी कांस्य युगीन ममियों के चेहरों और गर्दनों पर मिले पदार्थों का डीएनए विश्लेषण कर वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है कि यह दुनिया का सबसे पुराना संरक्षित पनीर है।
प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका 'सेल' (Cell) में प्रकाशित इस अध्ययन में बताया गया कि तकलामकान रेगिस्तान की अत्यधिक शुष्क जलवायु के कारण यह जैविक सामग्री सहस्राब्दियों तक सुरक्षित रही।
तकलामकान रेगिस्तान में प्राचीन डेयरी डीएनए की खोज
चीनी विज्ञान अकादमी के वैज्ञानिकों ने पाया कि यह पनीर गाय और बकरी के दूध को केफिर दानों की मदद से किण्वित करके बनाया गया था। इसमें लैक्टोबैसिलस जीवाणु के प्राचीन अंश मिले हैं।
इस खोज से पहले माना जाता था कि केफिर किण्वन केवल काकेशस क्षेत्र से शुरू हुआ था, लेकिन इस अध्ययन ने साबित किया कि मध्य एशिया में भी इसकी स्वतंत्र परंपरा थी।
“यह दुनिया में खोजा गया अब तक का सबसे पुराना पनीर है। प्राचीन डीएनए हमें प्रागैतिहासिक चरवाहों के आहार और सूक्ष्मजीव विज्ञान की अभूतपूर्व जानकारी देता है।”
लैक्टोबैसिलस बैक्टीरिया की 3,600 वर्षों की विकास यात्रा
विश्लेषण से यह भी पता चला कि प्राचीन बैक्टीरिया में आधुनिक उपभेदों की तुलना में एंटीबायोटिक प्रतिरोध काफी कम था।
किण्वन की इस प्रक्रिया से दूध में लैक्टोज की मात्रा कम हो जाती थी, जिससे उस दौर के चरवाहे वयस्क होने पर भी आसानी से दूध के पोषक तत्वों को पचा पाते थे।




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