औद्योगिक रूप से तैयार किए गए अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स (यूपीएफ) की जगह ताजे और प्राकृतिक भोजन को शामिल करने से हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है। प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल 'द लैंसेट रीजनल हेल्थ' में प्रकाशित एक ऐतिहासिक शोध में 1,18,000 से अधिक वयस्कों पर किए गए अध्ययन के बाद यह निष्कर्ष सामने आया है।
शोधकर्ताओं ने कैलोरी प्रतिस्थापन मॉडल के जरिए पाया कि यदि कोई व्यक्ति अपने दैनिक आहार में पैकेज्ड चिप्स, मीठे शीतल पेय, बिस्कुट और प्रिजर्वेटिव युक्त खाद्य पदार्थों का केवल 10 प्रतिशत हिस्सा ताजे फलों, दालों, सब्जियों और साबुत अनाजों से बदल देता है, तो कोरोनरी हृदय रोग के खतरे में 20 प्रतिशत तक की कमी आ जाती है।
आहार में छोटे बदलावों से मिलता है बड़ा चिकित्सीय सुरक्षा कवच
इसके अतिरिक्त, अध्ययन में शामिल लोगों में किसी भी कारण से होने वाली अकाल मृत्यु के जोखिम में 14 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। यह सुरक्षात्मक प्रभाव आय, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधि और मोटापे जैसे अन्य कारकों को ध्यान में रखने के बाद भी पूरी तरह स्थिर रहा।
कार्डियोलॉजिस्ट्स का कहना है कि पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में मौजूद कृत्रिम इमल्सीफायर्स, केमिकल स्वीटनर्स और अतिरिक्त सोडियम पेट के माइक्रोबायोम को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे शरीर के भीतर पुरानी सूजन पैदा होती है और रक्त वाहिकाओं को क्षति पहुंचती है।
“Our findings demonstrate that practical, incremental dietary swaps away from industrially formulated foods yield profound long-term cardiovascular and metabolic benefits.” — प्रमुख महामारी विज्ञानी, द लैंसेट रीजनल हेल्थ रिसर्च ग्रुप
रासायनिक प्रिजर्वेटिव्स, इमल्सीफायर्स और रक्त धमनियों की सूजन
चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि दिल को स्वस्थ रखने के लिए बहुत कठिन या सख्त डाइटिंग की आवश्यकता नहीं है। शाम को स्नैक्स के रूप में पैकेटबंद नमकीन की जगह मुट्ठी भर बादाम खाना या कोल्ड ड्रिंक की जगह नींबू पानी पीना ही इस सुरक्षा के लिए पर्याप्त है।
इस रिपोर्ट के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) सहित कई स्वास्थ्य निकायों ने डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों के पैकेट पर स्पष्ट चेतावनी लेबल लगाने की मांग तेज कर दी है।
Frequently Asked Questions
द लैंसेट के अध्ययन में किस आहार बदलाव की जांच की गई?
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन के 10 प्रतिशत हिस्से को ताजे फल, सब्जियों और दालों से बदलने के असर का अध्ययन किया गया।
इस आहार बदलाव से स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ा?
हृदय रोगों के खतरे में 20 प्रतिशत की कमी आई और किसी भी कारण से होने वाली मृत्यु दर में 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।





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