रवांडा के स्वास्थ्य मंत्रालय को अमेरिकी गैर-लाभकारी संगठन सबिन वैक्सीन इंस्टीट्यूट से मारबर्ग वायरस के प्रायोगिक टीके की 700 खुराकों की पहली आपातकालीन खेप प्राप्त हुई है। इस टीके के आने से देश में पहले मारबर्ग प्रकोप की पुष्टि होने के मात्र दस दिनों के भीतर चरण 2 का ओपन-लेबल नैदानिक परीक्षण शुरू करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

सितंबर के अंत में सामने आया यह मारबर्ग प्रकोप मुख्य रूप से किगाली के कई प्रमुख रेफरल अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मियों के बीच केंद्रित रहा है। मारबर्ग वायरस रोग एक अत्यंत घातक रक्तस्रावी बुखार का कारण बनता है, जिसकी मृत्यु दर 88 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसलिए अस्पतालों में संक्रमण रोकने के लिए डॉक्टरों और नर्सों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई।

अग्रिम पंक्ति के चिकित्सा कर्मियों के लिए आपातकालीन रिंग टीकाकरण शुरू

यह प्रायोगिक टीका 'cAd3-Marburg' के रूप में जाना जाता है, जिसमें मारबर्ग वायरस के सतह ग्लाइकोप्रोटीन को व्यक्त करने के लिए चिम्पांजी एडेनोवायरस वेक्टर का उपयोग किया गया है। मानव परीक्षणों के पहले चरण में इस एकल खुराक वाले टीके ने मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया और बेहतर सुरक्षा प्रोफाइल प्रदर्शित किया था, जिसके आधार पर आपातकालीन क्लिनिकल उपयोग की अनुमति मिली।

रवांडाई चिकित्सा टीमों ने लक्षित रिंग टीकाकरण रणनीति शुरू की है, जिसके तहत आईसीयू कर्मियों, नर्सों और संक्रमित मरीजों के निकट संपर्क में आए लोगों को टीका दिया जा रहा है। संक्रमण के केंद्रों के चारों ओर एक प्रतिरक्षा घेरा बनाकर, अधिकारी नैदानिक डेटा एकत्र करने के साथ-साथ वायरस के प्रसार को तुरंत रोकने का प्रयास कर रहे हैं।

“Deploying these investigational vaccine countermeasures within ten days of outbreak confirmation demonstrates our determination to protect healthcare workers and rapidly suppress Marburg transmission.” — डॉ. सबिन न्सानज़िमाना, रवांडा के स्वास्थ्य मंत्री

अंतरराष्ट्रीय सहयोग से महामारी पर त्वरित क्लिनिकल नियंत्रण की तैयारी

यह नैदानिक परीक्षण विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और अमेरिकी बायोमेडिकल एडवांस्ड रिसर्च एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (BARDA) के करीबी सहयोग से संचालित किया जा रहा है। बार्डा ने सबिन संस्थान के इस टीके के प्रारंभिक विकास में महत्वपूर्ण वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की थी, जिससे इसे तत्काल किगाली भेजा जा सका।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि रिंग टीकाकरण के साथ-साथ व्यापक संपर्क अनुरेखण, मरीज पृथक्करण और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। यदि यह परीक्षण सफल रहता है, तो यह भविष्य में अफ्रीका में फिलोवायरस महामारियों से निपटने के लिए एक वैश्विक मानक स्थापित करेगा।

Frequently Asked Questions

रवांडा को सबिन संस्थान से मारबर्ग वैक्सीन की कितनी खुराक प्राप्त हुईं?

रवांडा को अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों के परीक्षण के लिए 700 प्रायोगिक खुराक प्राप्त हुई हैं।

किगाली में प्रायोगिक मारबर्ग टीके के लिए किन्हें प्राथमिकता दी जा रही है?

डॉक्टरों, नर्सों, अस्पताल कर्मचारियों और पुष्ट मामलों के करीबी संपर्कों को पहले टीका लगाया जा रहा है।

Sources